अमलतास गहन चिकित्सा के लिये 250 बेड ओर उपलब्ध करवाएगा

देवास। देवास जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं आम जनों के अथक प्रयासों से कोरोना के वर्तमान में मरीज कम तो हुए हैं। किंतु एक तथ्य है जो अभी भी बरकरार है गहन चिकित्सा इकाइयों में गंभीर मरीजों की संख्या वैसी की वैसी ही बनी हुई है। इसका मुख्य कारण संक्रमित मरीजों का देरी से अस्पताल में पहुंचना है। मरीज इस बारे में ध्यान दें की संक्रमित होने पर अपने डॉक्टर को जल्द दिखाएं एवं  संपर्क में बने रहें। ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके। इसमें देखा जा रहा है लक्षण के शुरुआती दिनों में 4- 5 दिनों में छाती में संक्रमण हो रहा है और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा घटने लगती है। किंतु उसके पूर्व सीआरपी पहले दूसरे दिन ही बढ़ने लगता है अतः शुरुआती 5 दिन महत्वपूर्ण है। अगर सीआरपी बढ़ने लगे, छाती में संक्रमण होने लगे व ऑसिजन का स्तर घटने लगे तो आप तुरंत शासन द्वारा निर्धारित अस्पतालों में जाएं। स्थिति गंभीर होने का  महत्वपूर्ण कारण यह है  शुरुआती दौर में मरीज स्वीकार नहीं करता है उसको गंभीर लक्षण है और जब तक मरीज स्वीकार करता है कि उसे गंभीर लक्षण हैं तब तक देर हो चुकी होती है।

अमलतास के डॉक्टर जगत रावत का कहना है कि आंकड़ों के अनुसार 100 में से 3 मरीज गंभीर हो रहे हैं किंतु वह 3 कौन होगा वह वक्त ही तय करता है। इसलिए बीमारी को गंभीरता से लें क्योंकि हमारी जनसंख्या के हिसाब से 100 में से 3 मरीज भी लेंगे तो यहां आंकड़ा बहुत बड़ा है। इतने गहन चिकित्सा के बेड भी उपलब्ध नहीं है। अतः  अमलतास के चेयरमैन  मयंक राज सिंह भदोरिया ने 250 गहन चिकित्सा इकाई के बेड तैयार करने का फैसला समाज हित में लिया है।

Post Author: Vijendra Upadhyay