देवास/ मप्र.के शासकीय विभागों में शिक्षा विभाग के अंतर्गत चिर परिचित एक बड़ा शोषित वर्ग अतिथि शिक्षक हमेशा शासन की विसंगतिपूर्ण नीति की भेंट चढ़ा है चाहे किसी भी पार्टी की सत्ता हो हमेशा न्यूनतम वेतन और अनियमितीकरण का ग्रास बना है पिछले कई वर्षो में तनाव में आकर कुछ अतिथि शिक्षकों द्वारा आत्महत्या जैसी दुःखद घटना को अंजाम देना शुभ संकेत नहीं है।
सन 2018-19 में आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा में मात्र 25% पद आरक्षित करके विसंगतिपूर्ण नीति बनाकर अतिथियों के साथ महज अन्याय ही हुआ है अतः पत्र के माध्यम से मप्र शासन से अनुरोध है की कोरोना महामारी के बीच अतिथि शिक्षकों का शीघ्र नियमितीकरण कर स्थाई रोजगार प्रदान करने हेतु नीति बनाए और श्रेष्ठ सत्ता होने का परिचायक बने।