गुरिल्ला युद्ध के प्रणेता छत्रपति शिवाजी
देवास। प्राचीन भारतीय इतिहास में जब लूट-पाट, कू्ररता और अत्याचार के नित नये कीर्तिमान स्थापित हो रहे थे। 17 वीं शताब्दी में 14 वर्ष के बालक ने उसे रोकने का अदम्य साहस दिखाया। मुगल काल में मंदिरों को ध्वस्त किया गया। काशी- मथुरा का विध्वंस, हिंदुत्व पर गहरा आघात था। 17 वीं शताब्दी के उत्तर्राध में श्विाजी रूपी सूर्य का उदय हुआ, जिन्होंने अपने पुरूषार्थ के बल पर मुगलों द्वारा किए जा रहे अनाचार पर लगाम लगाई। महाराष्ट्र समाज के सभागार में छत्रपति शिवाजी के राज्यारोहण दिवस के अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक कार्यक्रम में नई दिल्ली से पधारे भविष्यनिधि कमिश्नर अमित वशिष्ठ ने उक्त विचार व्यक्त किए। उस जमाने में जब पुर्तगाली और अंगे्रज अपने अपने पांव जमाने का पयास कर रहे थे, हिन्दवी स्वराज्य की कल्पना असाधारण थी। शिवाजी का राज्यारोहण समारोह वास्तव में पुर्नजीवन था मृतप्राय: राष्ट्र का आरंभ था। शिव संस्कृति और सभ्यता का। शिवाजी की युद्धनीति कहीं भी उल्ल्ेखित नहीं, परंतु युद्ध में उनके अनूठे प्रयोग को कालांतर में गुरिल्ला युद्ध था। वर्तमान संदर्भ में सर्जिकल स्ट्राईक कहा जाता है।
अमित वशिष्ठ के अनुसंधान के अनुसार शिवाजी का अभ्युदय प्रांत नहीं संपूर्ण राष्ट्र का अभ्युदय है। संपूर्ण राष्ट्र में नवीन चेतना और अपराजय की भावना का संचार हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन व माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम के शिल्पकार दिलीप जाधव ने अतिथि परिचय दिया। इस अवसर पर इतिहास के पुरोधा एवं डॉ शिवदे पुणे का पुण्य स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के विशेष अतिथि महापौर सुभाष शर्मा ने स्वर्णिम आयोजन पर समिति को बधाई दी और नगर वासियों को प्रेरित करने हेतु नगर निगम के प्रयासों की जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही देवास विधायक श्रीमंत गायत्री राजे पवार ने अमित वशिष्ठ का आभार मानते हुए उन्हें कोटिश: धन्यवाद दिया। जिन्होंने युगपुरूष छत्रपति शिवाजी के शासन काल का जीवंत वर्णन किया। श्रीमती पवार ने वर्तमान किशोर एवं युवा पीढी को प्रेरित करने के लिये ऐसे शिक्षाप्रद कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया।
अतिथियों का स्वागत पद्माकर फडनीस, रेवंत राजोले, ज्योति चितले, कुमार जाधव, कीर्ति चव्हाण, हर्षवर्धन जगताप, संजय मालुसरे, अनिल साठे, दीपक कर्पे, राधिका इंगले ने किया। इस अवसर पर अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। इस अवसर पर बड़ी तादाद में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। समापन के पूर्व गुरूकुल अकादमी की संचालिका शालिनी चव्हाण ने वंदेमातरम की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन शिक्षाविद संजय शेलगांवकर ने किया।

