श्रेष्ठ कर्मो के साथ सेवा, समर्पण, त्याग का भाव रखने वाला ही भगवान का सच्चा भक्त है- पं. प्रदीप शास्त्री

देवास। अपने परिवार मेें रहकर भगवान का नाम स्मरण करतेें है उसे प्राप्ति के मूल तत्व के लिये किसी मंदिर में जाने की आवश्यकता नहीं है। श्रेष्ठ कर्म के साथ सेवा समर्पण और त्याग केे भावों से सब कुछ प्राप्त कर सकता है। ईश्वर सर्वव्यापी है। श्रद्धा और विश्वास रखने वाला ही ईश्वर का सच्चा भक्त होता है। यह आध्यात्मि विचार नवनिधि सामाजिक संस्था द्वारा मंडी धर्मशाला में आयोजित 108 श्रीमद भागवत महोत्सव में हो रही संगीतमय सात दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन भागवत भूषण पं. प्रदीप मिश्रा ने व्यक्त करते हुए कहा कि लोग कहते हैं पैसा बचाओ बुरे वक्त काम आएगा। भागवत कहती है कि भजन करो बुरा वक्त ही नहीं आएगा। भगवान से, गुरू से, माता पिता से नहीं डरो परंतु बुरे कर्मो से जरूर डरो, क्योंकि बुरे कर्मो का फल इस योनी और उस योनी दोनों में भोगना पड़ेगा। नहाने से अहंकार होता है और स्नान से अहंकार जाता है। शरीर पानी से धोना नहाना है वास्तविकता में एक दिन में साडे तीन करोड बार प्रभु का नाम जपना स्नान है। द्रोपदी प्रतिदिन साढ़े तीन करोड बार प्रभु का नाम लेती थी इसलिये उसके प्रत्येक रोम में कृष्ण समाहित थे।
कथा में भागवत प्रसंग का वर्णन करते हुए राजा परीक्षित के जन्म का वर्णन कर महाभारत के प्रसंगों का सुंदर आध्यात्मिक चित्रण करते हुए श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। वहीं आध्यात्म के गूढ रहस्यों द्वारा वर्तमान जवीन शैली पर हमारे संस्कार और संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभावों का यथार्थ वर्णन कर मनुष्य को आदर्श जीवन जीने के सूत्रों को बताये ।
बेटी का परित्याग परिवार में विनाश का कारण होता है
महाराजजी ने बताया कि राजा दशरथ एवं कौशल्या की पहली पुत्री शांता थी जिसके त्याग के कारण अयोध्या में अकाल हुआ एवं राजा दशथ की वंश वृद्धि रूक गयी थी। इस पुत्री का विवाह श्रृंगी ऋषि के साथ हुआ था। जब राजा दशरथ ने वंश वृद्धि के लिये यज्ञ करवाया था तब गुरू वशिष्ठ के कहने पर यह यज्ञ ऋषि श्रृंगी ने करवाया था । यज्ञ पूर्ण की आहूति के दिन दशरथ की बेटी का आगमन अयोध्या में हुआ तब दशरथ को पुत्र प्राप्ति का फल प्राप्त हुआ। कथा में भगवान शंकर एवं माता सति के चरित्र का वर्णन किया।
पार्वती के साथ भगवान शंकर से विवाह का सुंदर वर्णन करते हुए झांकी प्रस्तुत की गई। श्रीमद भागवत की पूजा अर्चना एवं 108 भागवत की पूजा यजमानों के द्वारा की गई। आरती में बतौर अतिथि सांसद मनोहर ऊटवाल, विधायक गायत्री राजे पवार, महापौर सुभाष शर्मा, कृष्णा शर्मा, विजया जोशी, मण्डल अध्यक्ष ओम जोशी, नगर महामंत्री धर्मेन्द्रसिंह बैस, गणेश पटेल, मनीष दांगी, राजेश जाट, देवेन्द्र नवगोत्री, सुनील मंडलोई, पार्षद मनोज राय आदि ने गुरूदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर अग्रवाल समाज के शंभुदयाल अग्रवाल इंदौर, राधेश्याम अग्रवाल एवं अग्रवाल पुष्पांजलि के सम्पादक नरेन्द्र अग्रवाल का सम्मान किया गया। कथा में आए श्रद्धालुओं ने 108 व्यासपीठ का पूजन तुलसीदल चढ़ाकर किया। कथा में बड़ी संख्या में महिला पुरूष उपस्थित थे।

Post Author: Vijendra Upadhyay

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