इच्छा का पूरा न होना ही दुख है – राजेश्वरानंदजी

देवास। गीता भवन में चल रहे पांच दिवसीय रामचरित मानस प्रवचन में आज तीसरे दिन संत राजेश्वरानंद जी ने कहा मनुष्य की इच्छा पूरी न हो तो दु:ख होता है,पूरी हो तो सुख होता है पर ईच्छा ही न हो तो शांति और आनंद है ।
जननी जनक बंधु सूत दारा
तनु धनु भवन सुहृद परिवारा ।
सबके ममता ताग बटोरी
मम पद मनहि बांध बरी डोरी ।।

मानस की इन अर्थपूर्ण पंक्तियों को केन्द्र में रखकर संतश्री ने कहा कि माता पिता बंधु पुत्र शरीर भवन मित्र परिवार जहां जहां हमारे मन की ममता जुड़ी है वह सब सिमटकर भगवान के चरणों से लिपट जाये । मन को बांधने वाली डोरी ही ममता है ।
आपने मानस के राजा मनु की कथा के माध्यम से प्रभु भक्ति का जिक्र करते हुए कहा भक्ति के चरम से जगत के मालिक को पाया जा सकता है । विषयों से अनासक्त होना त्याग है मगर मन की आवेगता वैराग्य है । संसार की सरिता में वही डूबता है जिसका अहंकार जि़ंदा है । जीवन के रहते हम जाग जाएं यह जरूरी है । मन से जुड़ी इन्द्रियाँ विषयों में रमती है और बुद्धि से जुड़कर हम सत्संग से जुड़ते है ।

कथा में आरएसएस के अभिषेक गुप्ता, कवि नरेंद्र अटल(महेश्वर), जयसिंह ठाकुर पूर्व महापोर, नंदकिशोर पाटीदार,बद्रीलाल जायसवाल(मंडी अध्यक्ष), पोपसिंह परिहार, घनश्याम सेंगर सोनकच्छ , दीपेश कानूनगो, विशाल यादव, भरत चौधरी आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।

Post Author: Vijendra Upadhyay

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