- वेंटिलेटर की जरूरत पडने पर जिला अस्पताल के अलावा दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं
- देवास के मरीज अब इंदौर, उज्जैन या प्रायवेट उपचार करवाने पर मजबूर
देवास टाइम्स/ देवास में कोरोना का प्रकोप मार्च माह से ही था। तब से देवास प्रशासन ने कोरोना मरीजों के लिए जिला अस्पताल के आलावा देवास के अमलतास अस्पताल को कोविड सेंटर बनाया था। अप्रैल से 15 अक्टूबर 2020 तक अमलतास में देवास, उज्जैन, आगर के कई कोरोना मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौटे है। यहां का रिकवरी रेट भी 91 % था। सितम्बर माह के बाद देवास में कोरोना के मरीज भी कम हो गए थे जिस कारण 16 अक्टूबर 2020 से अमलतास को शासन द्वारा नान कोविड सेंटर घोषित कर दिया गया था।
वर्तमान में कुछ दिनों से कोरोना के केस फिर से बढ़ने लगे है ऐसे में देवास में सीरियस केस बढ़ने की सम्भवना भी बनी हुई है। जिला अस्पताल में आम बेड करीब 50 है वही वेंटिलेटर बेड करीब 10 से 11 है। यदि अब सीरियस केस बढ़ते है जिन्हे वेंटिलेटर की जरूरत पड़ेगी तो देवास प्रशासन के पास देवास में कोई दूसरा विकल्प नहीं है मरीजों को और कही शिफ्ट करने का।
इस विषय पर हमारी बात मुख्य चिकित्सा एंव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एम.पी. शर्मा से हुई तो उनका कहना है की पिछले माह से कोरोना के मरीज कम होने की वजह से अमलतास को कोविड सेंटर से हटाकर मरीजों का उपचार जिला अस्पताल में ही किया जा रहा था। कुछ दिनों से फिर केस बढ़ रहे इसे देख यहां पर बेड बढ़ाये जा रहे है। वही वेंटिलेटर बेड भी 10 से 11 उपलब्ध है इसके आलावा यदि ओर जरूरत पड़ती है तो उन्हें उज्जैन या इंदौर पंहुचाया जायेगा। देवास में दूसरा विकल्प अभी उपलब्ध नहीं है आगे जरूरत पड़ने पर शासन चाहेगी तो कोविड सेंटर बनाएगी।
