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जिले में पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन एवं “लिंग परीक्षण” करने पर होगी सख्त कार्यवाही – कलेक्टर श्री शुक्ला
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कोई भी व्यक्ति लिंग जांच में, संलग्न पाये जाने पर एक्ट के तहत होगी कानून कार्यवाही
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देवास, 22 जनवरी 2021/ कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी चन्द्रमौली शुक्ला की अध्यक्षता में पीसीपीएनडीटी एक्ट से सम्बन्धित कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सीईओ जिला पंचायत श्रीमती शीतला पटले, एडीएम श्री प्रकाश सिंह चौहान, जनसपंर्क अधिकारी श्री आंनद मोहन गुप्ता, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमपी शर्मा, सिविल सर्जन डॉ. अतुल कुमार बिडवई, डॉ कैलाश कल्याणी, डॉ.शरद वीरपरा, सलाहकार समिति के सदस्य, जिले में सोनोग्राफी सेंटरों के सोनोलॉजिस्ट, उप जिला मीडिया अधिकारी कमलसिंह डावर, उप प्राचार्य नर्सिंग प्रशिक्षण केंद्र सोनिया पीटर सहित अन्य संबंधित उपस्थित थे।
कार्यशाला में कलेक्टर श्री शुक्ला ने कहा की पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत जिले में किसी भी सोनोग्राफी सेंटर पर लिंगानुपात की जांच नहीं होना चाहिए। सोनोग्राफी सेन्टर एक्ट का उल्लंघन नहीं करेगा अगर कहीं पर इस प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो तुरंत सख्त कार्यवाही की जाये। जिले में एडवाइजरी कमेटी सतत निगरानी करे तथा मॉनिटरिंग कमेटी निरंतर मोनिटरिंग करें। लिंग जांच करने में व्याप्त हर एक व्यक्ति समाज का दोषी है, उसे बख्शा नहीं जाएगा। सीएमएचओ डॉ शर्मा द्वारा जिले में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत की जा रही कार्यवाही और इसके उद्देश्य के बारे में जानकारी दी।

कार्यशाला में विशेष अधिवक्ता मुकेश सिन्हा द्वारा पावर पाइंट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रदेश में घटते हुए लिंगानुपात और एक्ट के संबंध में विस्तार से जानकारी दी सिन्हा ने जिला स्तर पर एडवाइजरी कमेटी और मॉनिटरिंग कमेटी के दायित्व को बताया कि वह किस प्रकार से जिले में कार्य करेगी। एक्ट को लागू करने के लिए अनेकों मेडिकल इश्यूज, सोशल इश्यूज आते हैं, जिसके लिए टेक्निकल लीगल इंफोर्समेंट मॉनिटरिंग और अवेयरनेस की आवश्यकता होती है। सलाहकार समिति द्वारा जिले में प्रभावी कार्यवाही कर एक्ट को लागू करेंगे समय-समय पर इसके द्वारा जिले में सोनोग्राफी सेंटरों की निरीक्षण, मॉनिटरिंग की जाती है के बारे में विस्तार से बताया। श्री उदल सिंह ने बताया कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन पर जिले में गठित सलाहकार समिति तुरंत एक्शन लेकर लीगल कार्रवाई किस तरह से करेगी।
प्रदेश में घटते हुए लिंगानुपात से समाज में अनेक परिस्थितिया बदल रही। हमें बेटियों के महत्व को जानना होगा शासन की अनेक योजनाओं के माध्यम से समाज मे जागरूकता आई हैं। लेकिन फिर भी लिंगानुपात घट रहा। इसका मुख्य कारण गर्भ में ही भ्रूण की जांच व लिंग आधारित गर्भपात करवाने से है। इसे रोकने के लिये पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम, 1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए भारत की संसद द्वारा पारित एक संघीय कानून है। प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक ‘पीएनडीटी’ एक्ट 1996, के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है। कार्यक्रम का संचालन जिला मलेरिया अधिकारी डॉ रश्मि दुबे ने किया एवं आभार सिविल सर्जन डॉ अतुल कुमार बिडवई ने माना।

