रेमडेसिविर की तरह बाजार से गायब हो गए ब्लैक फंगस के इंजेक्शन

देवास। अभी कोरोना का कहर कुछ हद तक कम ही हुआ था और शासन-प्रशासन राहत की सांस लेने लगा था कि ब्लैक फंगस जैसी बीमारी ने अपने पैर जमाना शुरु कर दिये है। अभी ब्लैक फंगस के कुछ मरीज ही अस्पताल में भर्ती हुए है कि इस बीमारी को ठीक करने में उपयोग आने वाले इंजेक्शन इंदौर के दवा बाजार सहित प्रदेश भर की दवा दुकानों से गायब हो गए है और रेमडेसिविर की तरह ब्लैक फंगस के इंजेक्शन की भी मारामारी शुरु हो चुकी है।

गौरतलब है कि मई माह की शुरुआत होते ही कोरोना का कहर धीरे-धीरे कम होने लगा था तथा रेमडेसिविर इंजेक्शन व आक्सीजन की मारामारी भी थमना शुरु हो गई थी, किंतु इसी बीच ब्लैक फंगस की बीमारी ने अपने पांव जमाना शुरु कर दिये है और जो मरीज कोरोना की जंग जीत चुके है, वे भी इस घातक बीमारी की चपेट में आते जा रहे है। खास बात यह है कि इस घातक बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए आपरेशन की आवश्यकता होती है, इसमें न सिर्फ भारी-भरकम खर्च आ रहा है, बल्कि इस बीमारी को खत्म करने के लिए इंजेक्शन का डोज भी बड़ी मात्रा में लगाया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार मरीज को ब्लैक फंगस के संक्रमण की मात्रा के अनुसार इंजेक्शन का डोज दिया जा रहा है और एक डोज 5 से 6 इंजेक्शन का होता है, जो लगभग 7 दिन तक लगातार चलता है। अभी तक इंदौर के डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस के लिए जो इंजेक्शन मरीजों को लगाए है, उनमें अफोकेयर, अन्फोनेक्स, कास्कोजिन-50, अन्फोलिप प्रमुख है। ये चारों ही इंजेक्शन ब्लैक फंगस संक्रमण में काम आ रहे है, किंतु दुर्भाग्य है कि बीमारी शुरु होते ही बाजार से चारों इंजेक्शन गायब हो चुके है और मरीजों के परिजन इंजेक्शन की तलाश में यहां-वहां घूम रहे है।

देवास केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद कोठारी की मानी तो पिछले 10-12 दिनों से ब्लैक फंगस के लिए इन इंजेक्शनों की डिमांड बढ़ी है। कोठारी ने बताया कि पहले इन इंजेक्शनों की यदाकदा ही जरूरत पड़ती थी, इसीलिए दुकानों पर इनका स्टॉक नहीं है। वहीं उपयोगिता कम होने के कारण कंपनियों द्वारा उत्पादन भी कम किया जाता है। अब चूंकि अचानक ब्लैक फंगस की बीमारी बढ़ गई है, इसलिए इंजेक्शन की डिमांड भी 10 गुना हो गई है, ऐसे में इंजेक्शन का अभाव हो गया है। सरकार को चाहिए कि अब इंजेक्शन बनाने वाली कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिये जाना चाहिए। 35 से 84 इंजेक्शन का लग रहा डोजकोरोना संक्रमित मरीजों को तो मात्र 6 रेमडेसिविर का डोज लगाया जा रहा था, किंतु ब्लैक फंगस संक्रमण में तो मरीजों को 35 से 84 इंजेक्शनों का डोज लगाया जा रहा है और उक्त इंजेक्शन की कीमत 7 हजार से लेकर 9500 रुपये प्रति इंजेक्शन है। ऐसे में मरीज के परिजन आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान हो रहे है। इसीलिए सरकार को चाहिए कि इन इंजेक्शनों की मांग बढ़े, उससे पहले ही इंजेक्शनों की व्यवस्था करना चाहिए।

Post Author: Vijendra Upadhyay