कोरोना महामारी को अवसर बनाकर उपभोक्ताओं को खुलेआम लूट रहे कालाबाजारी

-किराना बाजार की कालाबाजारी रोकने व सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्टर से मिला प्रतिनिधि मंडल


देवास। कोरोना महामारी में जहां एक ओर कई लोग व सामाजिक संस्थाएं जरूरतमंद और असहायो की सेवा करने में लगे हुए है। वहीं हमारे बीच कई ऐसे लोग भी है जो इस आपदा को अवसर समझकर इस महामारी में लोगों की सहायता करने की बजाय उन्हें खुलेआम लूटने में लगे हुए है। प्रदेश सहित पूरे शहरभर में किराना के सामानों में कालाबाजारी कर महंगे दामों में बेच रहे है। किराना बाजार की कालाबाजारी रोकने और कालाबाजारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर संस्था कृपालु परिवार का प्रतिनिधि मण्डल मंगलवार शाम को कलेक्टर से मिला और इस सम्बंध में अवगत कराया। संस्था के सुमेर सिंह दरबार ने बताया कि इस समय समूचा देश कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहा है। हमारे शहर में लंबे समय से लाॅकडाउन लगा है। वर्तमान में देखने में आ रहा है की बाजार में गोपनीय तरीके से तमाम किराना व्यापारी सामान बेच रहे हैं। यही वजह है की 1500 से 1800 के बीच मिलने वाला 15 किलो सोयाबीन तेल का डिब्बा 2500 से लेकर 2700 में बेचा जा रहा है। दाल, दलहन, चावल, यहां तक की चाय पत्ती के भाव भी अनाप-शनाप बढ़ाकर कालाबाजारी की जा रही है। जिससे शहर का गरीब वर्ग ही नहीं अपितु मध्यमवर्ग और उच्च वर्ग के लोग भी परेशान हैं।

जानकारी के मुताबिक किराना व्यवसाई बेचे गए किसी भी सामान का ग्राहकों को बिल नहीं देते। यही वजह है की उनके द्वारा जीएसटी विभाग को जो रिटर्न दाखिल किया जाता है उसमें लगाए जाने वाले बिलों में तेल, दाल, चावल, चाय पत्ती, मूंगफली दाना, साबूदाना जैसी रोजमर्रा की सामग्री का दाम बहुत कम होता है, जबकि इन्हीं सामग्रियों को जीएसटी में संलग्न किए जाने वाले बिलों की तुलना में करीब डेढ़ गुना भाव ग्राहकों से वसूला जाता है, जिसका उन्हें कोई पक्का बिल नहीं दिया जाता। संस्था ने कलेक्टर से मांग की है कि किराना व्यापारियों को सख्त हिदायत दी जाए की जीएसटी रिटर्न में संलग्न किए जाने वाले बिलों में दर्शाए गए भाव और ग्राहकों से वसूले जा रहे भाव का अंतर समाप्त करे। ऐसा नही करने पर कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों के विरुद्ध रासुका की कार्रवाई की जाए, जिससे शहर और जिले के गरीब वर्ग को कालाबाजारी से बचाया जा सके।

Post Author: Vijendra Upadhyay