कलेक्टर डॉ श्रीकान्त पांडेय ने मीडिया जनों को लिखा आत्मीय पत्र

देवास 19 अप्रैल 2020/ कलेक्टर डॉ श्रीकान्त पाण्डेय ने मीडिया जनों को आत्मीय पत्र लिखकर कोरोना संकट से उत्पन्न विषम परिस्थितियों में समाज के प्रति अपने दायित्वों को सजग होकर समर्पण भाव से निर्वाहन के लिए कृतज्ञता के जो भाव व्यक्त किए हैं वह निश्चित ही मीडिया जनों के लिए उत्साहवर्धक व मनोबल बढ़ाने वाले हैं।
कोरोना वायरस संक्रमण के विरुद्ध इस संग्राम में आमजन के स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से जहां स्वास्थ्य कर्मी, सफाई कर्मी, प्रशासन व पुलिस के अधिकारी कर्मचारी अपनी सीधी भूमिका निभा रहे हैं । वही मीडिया कर्मी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में एक सजग प्रहरी बनकर दिन रात स्वयं की जीवन को संकट में डाल कर कार्य कर रहे हैं निश्चित ही मीडिया जन भी उतनी ही सराहना व प्रशंसा के पात्र हैं। कलेक्टर डॉ पांडेय ने मीडिया जनों को पत्र लिखकर जो कृतज्ञता के भाव व्यक्त किए है निसंदेह ही मीडिया जन भी उनका शुक्रिया व्यक्त कर रहे हैं।
कलेक्टर डॉ पांडेय ने मीडिया जनों के लिए अपने आत्मीय भाव प्रकट करते हुए लिखा है कि मीडिया के मेरे प्रिय साथियों हर युद्ध में मकसद हो या न हो एक दृश्य मान शत्रु अवश्य होता है। मगर पिछले कई हफ्तों से जो लड़ाई हम लड़ रहे हैं, उसमें शत्रु अदृश्य है। यह एक ऐसी जंग है, जिसे घरों से बाहर निकलकर नहीं, बल्कि घरों में के भीतर ठिठककर और स्वयं को स्थगित करके ही जीता जा सकता है। अब यह जग-जाहिर है कि घर से बाहर पैर रखना बहुत जोखिम भरा कदम है।
लेकिन सारा-कुछ खतरा भांपते हुए भी आप जैसे कई लोग हैं, जो अपने-अपने घरों से बाहर निकलते हैं । अलसभोर से आधी रात तक। आपके भी बच्चे हैं, जिन्हें आप दुलारना चाहते हैं। आपके भी परिवार है, जिसके साथ आप गपियाना चाहते हैं। आपके भी बुजुर्ग हैं हैं , जिनके करीब घड़ी-भर बैठ कर कर आप दोबारा अपना बचपन जीना चाहते हैं। किंतु लोगों को उनके घरों में कैद रखने के लिए आप अपने घरों की कैद से बाहर निकल रहे हैं। एक छोटा सा मोबाइल और एक बड़ा सा गंतव्य साथ लिए आप रात-दिन अपने गांव-शहर में कहीं न कहीं पहुंचते अथवा भटकते हैं।
आप समाज को सूचित और शिक्षित करने की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। आप सब इस संग्राम के जुझारू योद्धा हैं, जिन्हें अपनी या अपनों की उतनी चिंता नहीं जितनी हमारी फिक्र है। आप वह हैं जिनके लिए अपने परिवार से पहले समाज आता है। आप वे हैं जो नागरिक जीवन को बचाने के लिए अपने जीवन को संकट में डाल रहे हैं। आप वे हैं, जिन्हें अपनी प्यास की इतनी फिक्र नहीं है है जितनी इस बात की परवाह है कि कोई विपन्न कहीं भूखा न सो जाए। आप वो है, जो आम आदमी की पीठ थपथपाते हैं और उसे हौसला दिलाते हैं कि वह जीतेगा ।
आप सब अच्छी तरह से जानते हैं कि कोरोना यह आभास भले ही पैदा कर दे कि उसने फूलों को कुम्हला दिया है, लेकिन इस आनंद प्रधान देश में बसन्त आने से वह कभी नहीं रोक पाएगा। इस संकट में जिसने हमें पहले से अधिक मनुष्य बना दिया है, आपके स्नेह और समर्पण को आपके अश्रुओं और अनुशासन को आपके मिशन भाव को और चतुर्दिक पसरी चुप्पियों के बीच विजय की परिभाषा लिखने के आप के अटूट संकल्प को हम गर्व से सैल्यूट करते हैं ।

Post Author: Vijendra Upadhyay

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