लघु उद्योग भारती का प्रयास रंग लाया, हाईकोर्ट से उद्यमियों को बड़ी राहत
बिना वैधानिक प्रक्रिया बिजली डिमांड पर रोक
देवास। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने बिजली विभाग द्वारा बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए जारी की गई भारी-भरकम डिमांड के मामले में उद्यमियों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। यह आदेश लघु उद्योग भारती के सहयोग से मैसर्स स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग वर्क्स, मैसर्स एस एम प्लास्टिक और मैसर्स माँ चामुंडा एग्रो प्रॉडक्ट्स द्वारा दायर रिट याचिका पर पारित किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रकरण को हाईकोर्ट अधिवक्ता अपूर्व कुमार साहू ने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। याचिका में यह तर्क दिया गया कि बिजली विभाग ने मीटर में कथित गड़बड़ी के आधार पर विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 126 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना ही डिमांड नोटिस जारी कर दिया, जो कानून के विपरीत है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक धारा 126 के अंतर्गत प्रोविजनल असेसमेंट, उपभोक्ता को आपत्ति दर्ज करने का अवसर एवं उस पर कारणयुक्त (स्पीकिंग) आदेश पारित नहीं किया जाता, तब तक किसी भी प्रकार की जबरन वसूली या विद्युत आपूर्ति विच्छेदन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने बिजली विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह नियमानुसार असेसमेंट की प्रति उपलब्ध कराए तथा आपत्तियों पर विधिवत निर्णय ले। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया के पूर्ण होने तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक या दबावपूर्ण कार्रवाई पर रोक लगाई गई है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं को चालू बिल की निर्विवाद राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश को प्रदेश के लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक संरक्षण के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में बिना प्रक्रिया के की जाने वाली कार्यवाहियों पर अंकुश लगेगा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी जितेन्द्र जायसवाल ने दी।


