पद्मजा स्कूल में 39वां वार्षिकोत्सव उत्साह के साथ मनाया
देवास। पद्मजा स्कूल का 39वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में शाला के विद्यार्थियों ने नृत्य एवं नाटकों के माध्यम से अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। लगभग 350 विद्यार्थियों ने संस्कृति के विविध रंगों को अपनी प्रस्तुतियों में उपस्थित अतिथियों के समक्ष रखा। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती मंदिर में दीप प्रज्जवलन एवं माल्यार्पण से हुई। छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किये गए। विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए लोकप्रिय गीतों जैसे देवा श्रीगणेशा, डोला रे डोला, रंग भीनी राधा, बरसाने की छोरी, शिव तांडव, महाकाली आदि पर मनमोहक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गई। राष्ट्र भक्ति के रंग को वन्दे मातरम एवं गूंज रहा हिंदुस्तान द्वारा प्रस्तुत किया गया। एक नृत्य नाटिका के माध्यम से चार युगों की व्याख्या की गई। कक्षा तीसरी और चौथी के बच्चों ने अपने गीत नृत्य के द्वारा जल के महत्व को बताया। प्री-प्राइमरी कक्षाओं के नन्हे बच्चों ने आयो रे यशोदा, हिप हिप हुर्रे, मातृ पितृ भक्ति, आसमान को छूकर आदि गीतों पर अपने मोहक नृत्यों से सभागार में उपस्थित दर्शको का मन मोह लिया। स्कूल ओर्केस्ट्रा द्वारा गायन एवं वादन की मधुर संगीतमय प्रस्तुति दी गई। कक्षा नर्सरी से चौथी तक की प्रस्तुतियाँ शिक्षिकाओं के मार्ग दर्शन में तैयार की गई एवं कक्षा 6 से 11 वी तक की प्रस्तुतियाँ विद्यार्थियों द्वारा पूर्व में अपने प्रशिक्षण के आधार पर स्वयं तैयार की गई। एक नाटक के माध्यम से पीढ़ियों के बदलाव को बताया गया तथा सन्देश दिया गया की जिस प्रकार माता पिता बच्चों का लालन पोषण करते है उसी भाव से बच्चों को भी माता पिता की वृद्धावस्था में सेवा करनी चाहिए। । एक अन्य नाटक में पर्यावरण के संरक्षण का सन्देश दिया गया I शाला रिपोर्ट का वाचन विकास देशमुख द्वारा किया गया। प्राचार्या डॉ. श्रीमती कोमल जैन ने अपने उद्बोधन में पालकों को बच्चों के लालन पोषण में अनुशासन के महत्व से अवगत कराया। साथ ही डॉ जैन ने पद्मजा स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में अर्जित उपलब्धियों को सभी के समक्ष रखा। गत वर्ष की कक्षा दसवीं एवं बारहवीं के 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को सम्मान पत्र एवं नगद पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में उपप्राचार्य स्वप्निल जैन ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों से भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिए स्वयं को सभी प्रकार से तैयारी करने का मार्गदर्शन दिया। जैन ने पालकों को भी सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में बच्चों के साथ उचित सामंजस्य बैठाने की सलाह दी तथा बच्चों को बचपन से ही सतत रूप से प्रतिदिन कम से कम 6-8 घंटे लगातार किसी न किसी कार्य में संलग्न रखने की आदत विकसित करने की बात कही एवं कार्यक्रम में विद्यार्थियों के प्रयासों को सराहते हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया। प्राचार्या एवं उप प्राचार्य ने कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए समस्त स्टॉफ सदस्यों एवं कर्मचारियों को बधाई प्रेषित की। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती ममता पाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शशिकांत नकसवाल, हिमांशु जैन, अपूर्वा प्रचंड, प्रतीक्षा वर्मा एवं समस्त पद्मजा स्टॉफ का उल्लेखनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन जन गण मन के साथ हुआ।


