नितिन सोनी, देवास
लगभग 1987 से समय मे टीवी पर प्रसारित होने वाला महाकाव्य श्री रामायण हम आज देख रहे है ये हमारे लिए बहुत ही गौरव की बात है ।
सोचिये उस वक्त तो न इंटरनेट था न फेसबुक, यूट्यूब,ट्विटर,गूगल आदि सुविधाएं आसान नही थी या कह लो थी ही नही तब सप्ताह में एक दिन आने वाला रामायण सीरियल किस हद तक लोगो के दिलो में राज करता होगा! वह भी श्री राम कथा , सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते है उस समय क्या उत्साह और आस्था होती होगी श्री रामायण को लेकर !
जब आज के युग मे भगवान श्री राम (अरुण गोविल) का यह मनमोहक चेहरा दिलो में बस गया तो उस समय लोग इन कलाकारों को भगवान की तरह पूजते थे उसमें जरा भी आश्चर्य की बात नही !
क्योंकि वाकई में रामायण धारावाहिक को जिस सत्यता के साथ बनाया मानो हर किरदार स्वयं अपनी सच्चाई कह रहा हो तो निश्चित ही वो किरदार पूज्यनीय बन जाता है ।
मेरे मन मे तो भगवान श्री राम की यह छबि घर कर गयी है मानो यही साक्षात भगवान श्री राम हो।

