बांग्लादेश 44 साल बाद भूला भारत का एहसान

बांग्लादेश 44 साल बाद भूला भारत का एहसान

भारत की मदद से बना बांग्लादेश, आज हिंदुओं पर कर रहा है अत्याचार

  • विजेंद्र उपाध्याय

देवास। 1971 में भारत ने मानवाधिकार के लिए बांग्लादेश का साथ दिया था। भारत ने युद्ध में करीब 500 करोड़, वहीं 1 करोड़ रिफ्यूजी पर भारत ने 525 करोड़ खर्च किए थे। जो आज के समय के 50 हजार करोड़ के बराबर है। बांग्लादेश की आजादी के लिए भारत के करीब 10 हजार सैनिक घायल हुए थे। वहीं 3900 सैनिक मारे गए थे। साथ ही भारत के 75 लड़ाकू विमान नष्ट हुए थे। आज बांग्लादेश 44 साल बाद भारत के इस एहसान को भूल गया है। आज हिंदू वहां खतरे में है। शांति के लिय जिस देश का जन्म हुआ वह आज हिंदुओं के लिय खतरा बन चुका है। वहां निरंतर हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे है।

बांग्लादेश में आज मंदिर तोड़ना और हिंदुओं पर हमला एक बड़ी योजना है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 24 घंटे में ही दो हिंदुओं की हत्या की गई। विगत 20 दिनों में ही 7 हिंदुओं की हत्या हुई। वहीं 36 दिनों में कट्टरपंथियों के हमले में 12 हिंदुओं की जान गई। कट्टरपंथियों ने एक परिवार के बच्चों का मुंडन कर गांव में घुमाया। एक विधवा महिला के साथ दरिंदगी की गई। हो सकता है यह आंकड़े और अत्याचार ज्यादा भी हो सकते है। जो सामने नहीं आए है। हिंदुओं की हत्या में कोई सामान्य तो कोई व्यापारी तो कोई पत्रकार भी शामिल है। मतलब सिर्फ वह हिन्दू ही हैं, जिन्हें चिन्हित कर मारा जा रहा है।

इस मामले में भारत अपने प्रयास कर रहा है। लेकिन बड़े-बड़े देश जो आज खुद को महाशक्ति मानते हैं, मानव अधिकारों की बात करते है, जो लोकतंत्र की बात करते है, सविधान की बात करते हैं। वह आज सब चुप बैठे हैं। आज हमारे देश के ही सेक्यूलर, वामपंथी कौम चुप हैं। जो आतंकवादियों के मानवाधिकार की बात करते हैं, वह भी चुप हैं। कुल मिलाकर हिंदुओं को यातना देना, उन्हें डराना-मारना ही कट्टरपंथियों का लक्ष्य है। यह एक सोची समझी योजना है। जो सिर्फ बांग्लादेश तक ही समिति नहीं रहेगी। अगर आज हम सतर्क नहीं हुए हमारे हिन्दू भाइयों के लिए एक नहीं हुए तो भविष्य में यह अराजकता भारत को भी झेलना पड़ सकती है।

मुगलों का इतिहास देखें तो उन्होंने भी हिंदुओं पर अत्याचार किए थे। भारत विभाजन की बात करे तो उसमें भी हिंदुओं पर ही अत्याचार हुए थे। धर्म के आधार पर पाकिस्तान देश बना, लेकिन दुर्भाग्य है कि भारत धर्म निरपेक्ष देश घोषित किया गया। इतिहास के पन्ने खोलेंगे तो उसमें सिर्फ हिंदुओं का ही खून दिखेगा।

हमें इतिहास और वर्तमान से सीखकर आने वाली पीढ़ी को और हमारे देश को सुरक्षित रखना जरूरी है। तब ही इस भारत माँ का कर्जा चुका पाएंगे।

Post Author: Vijendra Upadhyay