देवास। गायत्री शक्तिपीठ साकेत नगर एवं गायत्री प्रज्ञापीठ विजय नगर पर महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा एवं उत्साह पूर्वक मनाया जाएगा । गायत्री शक्तिपीठ जनसंचार विभाग के विक्रमसिंह चौधरी एवं विकास चौहान ने बताया कि शिव जी का स्थान हिन्दु धर्म में बहुत ऊंचा है और एक दृष्टि से सर्वोपरि है। एक शिव जी ही ऐसे देवता बतलाये गये है जो संपत्ति और वैभव के बजाए त्याग और अकिंचनता को वरण करते है। उन्होंने अमृत को त्याग कर गरल को पिया, हाथी तथा घोडे को छोड़कर बैेल की सवारी स्वीकार की और हीरा, मोती, रत्नों को त्याग कर सर्प और नरमुण्डों के आभूषण अपनाये। इस प्रकार महाशिवरात्रि का पर्व हमकों लोभ, मोह, लालसा के स्थान पर त्याग, अपरिग्रह और परहित साधना की प्रेरणा व उपदेश देता है।
महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व के अवसर पर 21 फरवरी को प्रात: 07 बजे से भगवान प्रज्ञेश्वर महादेव का रूद्राभिषेक किया जाएगा। प्रात: 8.30 बजे से श्री वेदमाता गायत्री, परम पूज्य गुरूदेव पं.श्रीराम शर्मा आचार्य, वंदनीया माताजी भगवती देवी शर्मा एवं देवोव्हान के साथ पंचकुण्डीय गायत्री महायज्ञ होगा। साथ ही दीक्षा, यज्ञोपवित, विद्यारंभ सहित विभिन्न संस्कार होंगे। प्रात: 11 बजे गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहूति, आरती एवं प्रसाद का वितरण होगा।
इसी प्रकार गायत्री प्रज्ञापीठ विजय नगर पर प्रज्ञापीठ की संरक्षिका दुर्गा दीदी के सानिध्य में प्रात: 8 बजे से अभिषेक, संगीतमय भजन कीर्तन होंगे एवं प्रसाद का वितरण होगा। गायत्री शक्तिपीठ के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी महेश पण्डया एवं गायत्री प्रज्ञापीठ के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी राजेन्द्र पोरवाल ने समस्त भावनाशील परिजनों से अनुरोध किया है कि इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ प्राप्त करें।

