देवास टाइम्स। देवास शहर प्राकृतिक सौंदयता से भरा पड़ा है। शहर के साथ – साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी कई ऐसे धार्मिक स्थल है जहाँ की प्राकृतिक सौंदयता देखने को बनती है। यहां कितने ही ऐसे स्थल है जहाँ बाहर के लोग भी यहां के नजारे देखने को आते है। देवास में आज तक यहां किसी ने ध्यान नही दिया और वह सुंदरता धीरे धीरे नष्ट हो गई।
देवास में माता टेकरी, शंकरगढ़ की पहाड़ियों, राजानल तालाब, मीठा तालाब ऐसे स्थल है जिन्हे प्रशासन चाहे तो उन्हें पर्यावरण के लिये सुरक्षित रख सकता है। यह वन संपदा, नदियां, झील, पेड़ पौधे, पशु – पक्षी के लिए अतिउत्तम है। प्रशासन इनके जंगल बचाकर देवास को नई सौगात दे सकते है।
देवास के पर्यावरण प्रेमी रणवीर सिंह चौहान ने हमे बताया कि देवास के आस पास पर्यावरण बिना किसी मानव मदद के फल फूल रहा था। राजानल तालाब पर पानी की अच्छी मात्रा और कम इंसानी आवागमन के चलते यहां नील गाय , हिरण, ख़रगोश ओर कई प्रजाति के पंछी निवास कर रहे थे।

कुछ समय से खदानो के आने से यहाँ भारी मात्रा में इंसानी गतिविधियों शुरू हो गयी हे जो कि यहां के पर्यावरण के चक्र ओर जीव जंतु के लिये मुसीबत बन चुकी है। आज ना तो यहां पहले की तरह बड़ी मात्रा में जानवर बचे है और जितने भी है वो डर कर जी रहे है। साथ ही यहां की सुंदरता भी छिन्न बिन हो गयी हे। यह उसी क्रम में चल रहा है जेसे की पहले शंकरगढ़ की खदानो ने वहां के पर्यावरण को बर्बाद किया। हो सकता है यहाँ जानवरो का कम होना यह भी दर्शाता है कि इन स्थलों पर लोगो द्वारा जानवरो का शिकार करना भी शुरू हो गया हो। वही तालाबों में भी खुले आम मछलियों को पकड़ा जा रहा है जबकि यह समय ऐसा है की उन्हें प्रजनन के लिए स्वतत्रं रखना चहिए। देवास प्रशासन को इधर ध्यान देना चाहिए ताकि यह प्राकृतिक सौदर्यता बनी रहे और वन्य जीव सुरक्षित रहे।


