कोलू नवरात्रि मनाने का पारंपरिक दक्षिण भारतीय तरीका


देवास/ कोलू नवरात्रि मनाने का पारंपरिक दक्षिण भारतीय तरीका है और यह मूल रूप से सीढ़ियों के सेट पर रखी गई गुड़िया और मूर्तियों का सजाया हुआ प्रदर्शन है। इन चरणों को विकासवादी सीढ़ी के रूप में भी देखा जा सकता है, जिस पर हममें से प्रत्येक को जीवन में प्रगति करने के लिए चढ़ना होगा।
गुड़ियों में अनेक देवी-देवता, जानवर, मनुष्य और बच्चे शामिल हैं।
इस वर्ष प्रसिद्ध शिक्षाविद् और फेथ फाउंडेशन ग्लोबल स्कूल देवास की अकादमिक निदेशक डॉ. परिमला श्रीनिवासन विशिष्ट पारंपरिक तरीके से नवरात्रि मना रही हैं। उन्होंने 100 साल से अधिक पुरानी कृष्ण लीला, दशावतारम, अष्टलक्ष्मी और चीनी मिट्टी की मूर्तियां प्रदर्शित की हैं।
मुख्य आकर्षण एक मनोरंजन पार्क है जहां एक बगीचे में विभिन्न प्रकार के खेल खेले जा रहे हैं।

Post Author: Vijendra Upadhyay