कायाकल्प पर चढ़ा मायाकल्प का बुखार

देवास में हाल फिलहाल विकास की गति प्रदान करने हेतु प्रशासन द्वारा महात्मा गांधी जिला अस्पताल को कायाकल्प के अंर्तगत नया रूप दिया गया। यहां के बाहरी अनावरण को वर्तमान की डिज़ाइन अनुसार डिजाइन कर के नया रूप दिया गया। जिला अस्पताल का यह नया रूप सभी को पसंद भी आया। साथ ही प्रशासन ने यहां पर कई चिकित्सा सेवाएं भी बढ़ाई। जिला अस्पताल  देवास का नवीनीकरण कर कायाकल्प किया गया। जिस कारण जिला अस्पताल ने प्रदेश स्तर पर द्वितीय अवार्ड भी जीता। कायाकल्प से जिला अस्पताल का रूप परिवर्तित हो गया। कहने का मतलब यह है कि कोरोना की लहरों को पार करने के लिये इस जहाज (जिला अस्पताल) को दुरुस्त किया गया।

लेक़िन जहाज को चलाने वाले कर्मचारीयो, डॉक्टरों का कायाकल्प नहीं हो पाया। क्योकि सभी वर्षों से मायाकल्प मे लगे हुए है।जिला अस्पताल से आये दिन शिकायते आती है। इलाज करवाने जाने वाले गरीब मरीज और उनके परिजन मायाकल्प की भेंट चढ़ जाते है। कभी वार्ड में ड्यूटी दे रहे कर्मचारियों की अनुपस्थिति तो कभी डॉक्टरों का अनुचित व्यवहार, कभी पैथालॉजी लेब पर जांचों को लेकर अव्यवस्था, कभी ब्लड बैंक के खून चूसने वालो की मनमानी, कभी पार्किंग ठेकेदारों की वसूली परिजनों को उठाना पड़ती है। कई बार यहां से गरीब परिजनों की गाड़ियां तक चोरी हो चुकी है।

लेकिन सवाल यह उठता है कि गरीब लोग इलाज हेतू जाए भी कहा..? अब तो सरकारी योजनाओं के चक्कर मे सरकारी डॉक्टर भी इलाज पर हाथ खड़े कर देते है, और प्राइवेट अस्पतालों का रास्ता दिखा देते है। फिर यहां योजना अनुसार चलता है कमीशन का बाज़ार….अब कमीशनखोरी हर जगह है तो स्वास्थ सेवाए कैसे पीछे छूट सकती है। कोरोना काल मे सभी ने देखा है स्वास्थ्य सेवाओं ने कैसे अमानवीय तरीके से माया का भंडार भरा है। कुल मिलाकर जिला अस्पताल के कायाकल्प जहाज को पार लगाने वाले लोग ही अपनी मायाकल्प के चक्कर मे इसे डुबाने में लगे है।

Post Author: Vijendra Upadhyay