देवास। इंदौर से देवास शहर में प्रवेश करने वाले रसूलपुर चौराहा पर तो ग्रीन बेल्ट की भूमि पर ही 40 से अधिक प्लाट काटकर बेच दिए। हालांकि अब शिकवा-शिकायत के बाद गत 30 मार्च को नगर निगम द्वारा सभी दुकानदारों को नोटिस जारी कर 7 दिवस के भीतर अपने निर्माण हटाने के लिए कहा गया है। यह अवधि 6 अप्रैल को समाप्त होगी। अब देखना है कि अवधि समाप्त होने के बाद नगर निगम द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है।
गौरतलब है कि रसूलपुर बायपास पर एक आदिवासी की कृषि भूमि पर शहर के प्रभावशाली लोगों ने 41 भूखंड काटकर बेच दिये थे, जिन पर अब होटल, ढाबे व अन्य व्यवसाय संचालित हो रहे है और अधिकांश भूखंड पर बड़े व पक्के निर्माण भी हो चुके है। जब इस मामले की शिकायत हुई तो मामले की जांच राजस्व विभाग द्वारा की गई, जिसमें पता चला कि उक्त भूमि ग्रीन बेल्ट की है, जहां पर शासन के नियमानुसार किसी प्रकार का निर्माण नहीं हो सकता है। बावजूद इसके यहां पर धड़ल्ले से निर्माण हो गए। इस बात की जानकारी नगर निगम के सिटी इंजीनियर नागेश वर्मा व अन्य अधिकारियों को भी थी, किंतु वे शिकायत का इंतजार करते रहे और मौके पर निर्माण पर होते रहे।
हालांकि अब इस पूरे मामले की तथ्यात्मक शिकायत होने के बाद नगर निगम के भवन अधिकारी द्वारा 30 मार्च को नोटिस जारी कर कहा गया है कि बिना सक्षम स्वीकृति के किए गए अवैध निर्माण हटाए जाए। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि नगर पालिक निगम अधिनियम नियम 1956 के अंतर्गत बिना किसी सक्षम स्वीकृति के अवैध निर्माण कार्य किया गया है। इस नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया कि बिना अनुमति ग्रीन बेल्ट की भूमि पर पक्का निर्माण किया गया है तथा भूखंड स्वामियों को 7 दिवस के भीतर भूमि स्वामित्व के दस्तावेज, भवन निर्माण की अनुमति एवं स्वीकृत मानचित्र कार्यालय में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। उक्त समयावधि पश्चात दर्शाए गए अवैध निर्माण को नगर पालिका निगम अधिनियम की धारा 307 तथा मप्र भूमि विकास नियम 1 जून 2012 के नियम 7 (3) के प्रावधानों के अंतर्गत नगर निगम की रिमूवल गैंग द्वारा हटाया जाकर होने वाले व्यय की वसूली भी संबंधित से की जाएगी।
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