विन्ध्याचल अकादमी में स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव पर आयोजित हुई व्याख्यानमाला

  • विद्यार्थी अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयास में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें-डॉ. विकास दवे

देवास। विंध्याचल अकादमी देवास में आजादी के अमृत महोत्सव अभियान के अंतर्गत समारोह पूर्वक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। जिसमें आगन्तुक अतिथियों डॉ. विकास दवे निदेशक म.प्र. साहित्य अकादमी, भोपाल एवं जिला शिक्षा अधिकारी देवास हीरालाल खुशाल द्वारा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के सम्मुख अपने विचार प्रस्तुत किए ।
सर्वप्रथम आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर विद्यालय के सैकड़ों विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों एवं म.प्र. के अनाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा आजादी के लिए किए गए विभिन्न आंदोलनों को प्रोजेक्ट के रूप में आकर्षक सज्जा के साथ तैयार कर प्रदर्शनी के रूप में अवलोकनार्थ प्रस्तुत किए गए जिसकी भरपूर प्रशंसा अतिथियों द्वारा की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीपप्रज्वलन एवं भारत माता, स्वामी विवेकानंदजी के चित्र पर माल्र्यापण से किया गया। इस अवसर पर विद्यालय संचालक दिनेश गुप्ता एवं प्राचार्य प्रतीक मेहरूनकर उपस्थित थे। अतिथि परिचय प्राचार्य प्रतीक मेहरूनकर द्वारा दिया गया। अतिथि स्वागत संचालक दिनेशगुप्ता एवं प्राचार्य द्वारा पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर किया गया। प्रारंभिक उदबोधन में संचालक दिनेश गुप्ता ने आजादी के अमृत महोत्सव का महत्व व नई पीढ़ी के लिए उसके लाभ पर बल देते हुए कहा कि इस पर्व को प्रधानमंत्री ने पूरे वर्ष तक मनाने का निर्णय लिया है। हमारी पहली पीढ़ी ने आजादी के लिए होने वाले संघर्ष को भोगा है। वे आजादी का महत्व जानते थे। आज की पीढ़ी इसे समझ सके यही इसका उद्देश्य है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप मेें पधारे जिला शिक्षाअधिकारी हीरालाल खुशाल ने छात्रों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आज हमें अभिनेता अभिनेत्रियों के नाम तो याद रहते है पर हम क्रांतिकारियों व राष्ट्र भक्तों के नाम भूल जाते है। यदि आने वाले कल को बीते हुए कल का ज्ञान नही होगा तो देश सशक्त नही बन पाएगा। उन्होने उधम सिंह, आजाद और भगत सिंह आदि को याद करते हुए बताया कि हमें इनकी तरह राष्ट्र के लिए जीना चाहिए। देश भक्ति सीखने की सही उम्र यही है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक एवं बाल मनोविज्ञान पर अनेकों पुस्तकों के रचनाकार डॉ. विकास दवे ने कहा कि यदि नई पीढ़ी देश के वीरों व महापुरूषों को नही जानती तो यह पुरानी पीढ़ी का दोष है। हमें छात्रों से प्रश्न ना पूछकर छात्रों को प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करना चाहिए। राष्ट्र भक्ति हमारे शरीर की धमनियो में बहने वाला खून है। अपने वक्तव्य में कुछ अनाम राष्ट्रभक्त महिलाओं जैसे प्रीतिलता, वाजेदा और बेलादेवी के उदाहरण देकर उनके त्याग को याद किया। अपने उद्बोधन में डॉ. दवे ने कहा भारत भूमि पर उसी का सम्मान होता है जो मातृ भूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर करते है। इसी कडी में शाला शिक्षक राजेंद्र परमार ने राष्ट्र भक्ति का गीत वह जीवन ही क्या जीवन है जो काम देश के आ न सका। गाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम संचालन जसविंदर कौर गांधी ने किया तथा उपप्राचार्या मानसी दिघे ने आभार व्यक्त किया तथा । भारत माता की जयकार के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

Post Author: Vijendra Upadhyay