पुष्पा फिल्म की तर्ज पर लकड़ी का काला कारोबार

  • अवैध लकड़ी के परिवहन से वसूले जा रहे हजारो

देवास। जिस तरह छोटे से लेकर बड़े महानगरों में सीमेंट कांक्रीट का जाल फैलता जा रहा है और जहां जंगल थे, वहां बड़ी-बड़ी मल्टियां खड़ी हो गई है। ऐसे में पर्यावरण को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इसी पर्यावरण को बचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार बचे हुए वन क्षेत्र को सुरक्षित करने के अथक प्रयास कर रही है और इन प्रयासों में सरकार हजारों-लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये प्रतिमाह खर्च कर रही है और भारी-भरकम वेतन देकर वनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन रक्षक से लेकर वन संरक्षक को दी गई है, किंतु इसके ठीक विपरीत वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से न सिर्फ वनों की कटाई हो रही है, बल्कि आम, बंबूल व अन्य लकडिय़ों का देवास-इंदौर बायपास से धड़ल्ले से परिवहन किया जा रहा है। इसके लिए बकायदा रात को बायपास पर दलाल नियुक्त किए गए है। इतना ही नहीं नाके से लेकर अधिकारियों तक की राशि फिक्स की गई है। छोटे वाहनों से 2 हजार रुपये और बड़े वाहनों से 5 हजार रुपये प्रत्येक गाड़ी से वसूले जाते है। यह कालाबाज़ारी पुष्पा फिल्म की तर्ज पर हो रही है।

इस काले कारोबार से जुड़े सूत्रों की माने तो देवास बायपास से प्रति रात्रि 30 से अधिक छोटे-बड़े वाहन अवैध लकड़ी लेकर इंदौर जाते है। ये लकड़ी देवास जिले के पीपलरावां सहित पड़ोसी जिले शाजापुर, शुजालपुर, सीहोर, आष्टा यहां तक कि बालाघाट से भरकर लाई जाती है, जो इंदौर पहुंचती है। इंदौर में लगभग 2 हजार आरा मशीन है, जहां पर लकड़ी की अत्यधिक खपत होने के कारण अधिकांश जिलों से लकड़ी इंदौर से भेजी जाती है। अवैध लकड़ी के परिवहन की जानकारी पुलिस से लेकर वन विभाग के अदने से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक को होती है और इन सभी के पास निर्धारित राशि पहुंच जाती है। बताया जा रहा है कि देवास में इस काले कारोबार को संचालित करने के लिए पंकज नामक एक दलाल नियुक्त किया गया है, जो प्रत्येक वाहनों से पैसा लेकर वन विभाग के अधिकारियों को देता है। सूत्रों की माने तो रात को लकड़ी से भरा हुआ वाहन इंदौर जाता है और जब दिन के उजाले में खाली वापस लौटता है तो देवास बायपास पर ही वह राशि देता है, जो बड़े वाहनों के लिए 5 हजार और छोटे वाहनों के लिए 2 हजार रुपये निर्धारित है। वहीं भोपाल रोड पर स्थित वन चौकी पर 1 हजार रुपये प्रत्येक गाड़ी देना पड़ता है। सूत्रों के अनुसार इनमें से किसी भी वाहन के पास लकड़ी परिवहन की शासकीय अनुमति नहीं होती है। बावजूद इसके रात के अंधेरे में 25 से 30 वाहन देवास बायपास से गुजर कर इंदौर जाती है।

कैसे होता है काला कारोबार
सूत्रों की माने तो लकड़ी का यह अवैध व काला कारोबार पूरी सांठगांठ के साथ होता है और जब भी लकड़ी लेकर वाहन अपने स्थान से निकलता है तो गाड़ी मालिक या लकड़ी कारोबारी देवास के दलाल को फोन लगाकर गाड़ी का नंबर व चालक का मोबाइल नंबर दे देता है, ताकि उक्त गाड़ी देवास से आसानी से इंदौर की ओर निकल सके। यदि कोई गाड़ी मालिक या लकड़ी कारोबारी जानकारी नहीं देता है तो उसकी गाड़ी देवास बायपास पर पकड़ ली जाती है और फिर मोटी रकम लेने के साथ तोड़-बट्टा किया जाता है। इस बात की जानकारी सभी को होती है, लिहाजा डायल 100 को प्रत्येक गाड़ी 300 रुपये, चौकी पर 1 हजार रुपये, रात्रि गश्त करने वाली पुलिस को 300 से 500 रुपये, बाकी दलाल को निर्धारित राशि मिल जाती है।

ऐसा कोई प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं आया है। फिर भी यदि ऐसा कोई अवैध कारोबार चल रहा है तो हम उसे रोकने के लिए संकल्पित है। इस मामले की जांच कराएंगे और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो निश्चित रूप से उसके खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
पी.एन. मिश्र
वन संरक्षक, देवास

Post Author: Vijendra Upadhyay