देवास विगत दो वर्षों से देख रहा है कि कोरोना काल मे देवास प्रशासन ने हर सम्भव कार्य किये है। वर्तमान के सभी प्रमुख अधिकारी चाहे कलेक्टर हो, पुलिस अधीक्षक हो, कमिश्नर हो या देवास एसडीएम हो। चारो हमेशा सक्रियता से शहर हित मे कार्य कर रहे है।कोरोना के शुरुवाती समय मे चारो अधिकार कोई और थे। लेकिन उनकी कार्यशैली शायद तत्कालीन सरकार के अनुरूप थी। क्योंकि सरकार अनुसार शहर की राजनीति का भी दबदबा रहता है।
जब प्रदेश में सरकार बदली तो स्वाभाविक है कि हर शहर की राजनीति और प्रशासनिक अधिकारियों में बदलाव भी सम्भव होगा ही। फिर इसमे हमारा देवास कैसे अछूता रहता…..समय अनुसार बड़े चारो अधिकारी बदले गए। जिसका रिजल्ट हमें देखने को भी मिला। कोरोना में हर सम्भव प्रशासन का योगदान..पुलिस विभाग का अवैध गतिविधियों पर कार्यवाही..देवास शहर को स्वच्छ बनाने में नगर निगम की कोशिश..सभी के परिणाम सकारात्मक रहे।
हा यह बात अलग है की हर विभाग में कार्य करने वाले कुछ अपवाद लोगो के कारण विभाग जरूर बदनाम होता है।
दो दिन पूर्व मीडिया में यह खबर आई कि प्रदेश के मुखिया ने देवास, इंदौर के कलेक्टर को उनकी कार्यशैली के कारण फटकार लगाई। कुछ मीडिया में अन्य कार्यो को लेकर उनकी प्रशंसा भी आई। लेकिन सत्य क्या था वह प्रदेश के मुखिया और शहर के कलेक्टर ही जानते है।
लेकिन इसप्रकार की घटना में कही न कही राजनीति भी जिम्मेदार होती है। प्रशासनिक अधिकारी शहर हित मे कार्य करने के लिये स्वंतत्र तो होता है, लेकिन राजनीतिक बंधन से घिरा भी रहता है। फिर प्रदेश का मुखिया तो राजनीति की बैसाखी पर ही चलता है। अगर वह उसे ही छोड़ देंगा तो चल कैसे पायेगा।

