मृत्यु का स्मरण हमें भगवान की याद दिलाता है- रक्षा सरस्वती

देवास। संसार के विषय भोग के साथ सुख का अनुभव करने वाला मनुष्य सत्य के वास्तविक स्वरूप को पहचान नहीं पाता। जीवन में वही सुखी है जिसे सत्य की पहचान है। संसार में सत्य के दो स्वरूप है एक परमात्मा और दूसरा मृत्यु। हम परमात्मा को भले भूले मगर मृत्यु को कभी नहीं भूले। सभी जानते हैं कि मृत्यु अटल सत्य है, जब भी मृत्यु का स्मरण होगा तब हमें परमात्मा की याद आएगी। यह आध्यात्मिक विचार जवाहर नगर में कामिका महादेव मंदिर समिति द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा में भागवत रत्न रक्षा सरस्वती ने व्यक्त करते हुए कहा कि जिसकी अपेक्षा कम होती है वही उदार बन सकता है। कथा प्रसंग में भगवान शिव और पार्वती के विवाह का वर्णन सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव के दर्शन जिस समय चाहो उस समय हो सकते हैं क्योंकि भगवान शिव किसी भक्त से अपेक्षा नहीं रखते हैं इसलिये उदार हैं। मन को चार प्रकार से जीता जा सकता है। पहले अपने आसन को जीतो, दूसरा अपनी स्वासों को जीतों, तीसरा अपनी संगत को जीतो, फिर इंद्रियों को जीतो तब जाकर ध्यान की अवस्था प्राप्त होगी। मन अपने वश में होगा, हृदय में ईश्वर की अनुभूति होगी। सिद्ध पुरूष इन्हीं चार क्रियाओं से देवत्व का स्थान प्राप्त करते हैं। कथा में सती प्रसंग, कपिल मुनि का चरित्र, सृष्टि के निर्माण की कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया।

कथा में शिव पार्वती के विवाह की सुंदर झांकी का दृश्य दिखाया गया। व्यासपीठ की पूजा दिलीप अग्रवाल, गणेश अग्रवाल, गुरप्रित ईशर, हेमंत बिसोरे, कोशिक गुर्जर आदि ने की। जैन समाज महिला मण्डल की ओर से डॉ. मनीषा बापना, प्रभा जैन, रागिनी चौधरी, सविता सुराणा, प्रमिला वैद्य, कुसुम जैन, आभा चौधरी, रमा चौधरी, राजपूत समाज महिला मण्डल की अध्यक्ष कल्पनासिंह तंवर , उपाध्यक्ष सुशीला तोमर, महामंत्री पुष्पा चौहान, सचिव कांती राजपूत, दुर्गा तोमर, सीमा चौहान आदि ने ने रक्षा सरस्वती का स्वागत किया। आरती में पत्रकार अमिताभ शुक्ला, हिमांशु राठौर बाबा, सौदानसिंह राजपूत, पंकज अग्रवाल आदि उपस्थित थे। आज कथा में प्रभु श्रीराम एवं कृष्ण जन्म की कथा का वर्णन होगा।

Post Author: Vijendra Upadhyay

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