भारतीय संस्कृति की रीढ़ है परिवार निर्माण

हजारों श्रद्धालुओं ने महायज्ञ में आहुतियां दी
देवास । संस्कारो की अविरल धारा से नव पीढ़ी का अभिषेक कराने से ही उनका मनुष्य जीवन सफल होगा । किसी भी परिवार की दौलत उसकी संस्कारित युवा पीढ़ी होती है । आज हो यह रहा है कि भावी पीढ़ी के लिए तिजोरियों में धन दौलत एकत्र की जा रही इससे सँस्कारो की तिजोरी खाली रह रही है । युवा पीढ़ी को समृद्ध बनाना है तो उनके जीवन में सँस्कार रूपी पूजी जमा करें ।
यह उदगार अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के प्रज्ञा पुराण कथा वाचक मानस मर्मज्ञ पंडित श्यामबिहारी दुबे ने अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में शिप्रा में जारी चार दिवसीय 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ तथा प्रज्ञा पुराण कथा आयोजन के दूसरे दिन आज धर्म सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये । गायत्री शक्तिपीठ जनसंचार विभाग के विक्रमसिंह चौधरी एवं विकास चौहान ने बताया कि 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, विश्व कल्याण एवं पर्यावरण संवर्धन हेतु आहुतियां प्रदान की ।
प्रज्ञा पुराण कथा में आगे श्री दुबे ने परिवार निर्माण पर बोलते हुए मनुष्य जीवन में परिवार का महत्व बताया एवं परिवार निर्माण पर ध्यान देने के बारे में कहा । संगीतमय कथा में शान्तिकुंज के महेश राठौर, हेमलाल, अमरनाथ एवं मनोज संगत कर रहें हैं । 16 अप्रैल को प्रात: व दोपहर के सत्र में महायज्ञ तथा प्रज्ञा पुराण कथा वाचन के साथ ही सोमवती अमावस्या के अवसर पर शाम को दीप यज्ञ भी आयोजित होगा।
आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि इस धार्मिक अनुष्ठान में सम्मिलित हो कर पुण्य लाभ प्राप्त करें ।

Post Author: Vijendra Upadhyay

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