देवास/ म.प्र. में राजनीती की गर्माहट पिछले चुनाव के बाद से ही बनी हुई है। कमलनाथ सरकार के आने के बाद वादे अनुसार आम नागरिको के बिजली बिलो में राहत दी गई थी। जिससे हर आम नागरिक खुश था। वही उद्योगों और कमर्शियल बिलो में यूनिट रेट की बढ़ोतरी की गई थी। लेकिन राजनीती की उथल पुथल के चलते कोरोना कहर के बीच में कमलनाथ सरकार गिर गयी और शिवराज की सरकार बन गयी।
शिवराज सरकार के बाद मुख्यमंत्री शिवराज कोरोना आपदा में व्यस्त हो गए। इसी कोरोना के बचाव हेतु 22 मार्च 2020 से प्रदेश में लॉक डाउन चल रहा हे उसके बाद भी बिजली विभाग द्वारा मार्च और अप्रैल माह के बिजली के बिल ऑनलाइन जनरेट कर दिए गए। नागरिक को अभी इस महामारी के चलते अपने घर चलाने का टेंशन है वही दूसरी और भारी भरकम बिलो का टेंशन और हो गया। कुछ कमर्शियल ऑफिस ओर उद्योगों का कहना है की पिछले 50 दिनों से हमारा कामकाज बंद है उसके बाद इतने भारी भरकम बिल कैसे आ गए।
अब सवाल यह उठता है की लॉक डाउन के चलते केंद्र सरकार ने आम लोगो को बहुत सी सुविधाए दी है तो राज्य सरकार द्वारा बिजली के बिलो का बोझ क्यों?

इसी बात को लेकर कल देवास शहर के कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी ने अकेले धरना दिया और शिवराज सरकार पर आरोप लगा कर कहा की शिवराज चौहान ने खुद 11 सितंबर 2019 को विदिशा में कहा था की कोई भी नागरिक 100 रुपये से ज्यादा का बिजली बिल आये तो भरना मत और अगर तुम्हारी बिजली कट जाएगी तो में स्वंय उसे जोडूगा। आज जब यह खुद मुख्यमंत्री बन गए है तो आम लोगो को भारी राशि के बिल का बोझ दे रहे है। जबकि अभी लॉक डाउन के चलते सारे व्यापार व्यवसाय भी बंद है।
इस विषय में हमारी बात बिजली विभाग के अधिकारी पी.एस.मतकर से हुई, उनका कहना है की लॉक डाउन के चलते अभी कही भी बिजली मीटरों की रीडिंग नहीं हो पाई है। इसलिए सभी के एवरेज बिल आये है या पिछले साल के बिल के एवरेज में बिल जनरेट हो गए है। जब लॉक डाउन ख़त्म हो जायेगा तब सभी घरो के बिजली मीटरों की रीडिंग लेकर बिल को पुन सुधारा जायेगा।

