अशासकीय शिक्षण संस्था संचालक संघ ने विभिन्न मांगों को लेकर दिया ज्ञापन

देवास। अशासकीय शिक्षण संस्था संचालक संघ देवास ने विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन कलेक्टर ऑफिस में अधीक्षक भू-अभिलेख मुरलीधरन को अध्यक्ष राजेश खत्री, सचिव दिनेश मिश्रा, स्वप्निल जैन के द्वारा दिया गया। ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि शासन, प्रशासन अशासकीय संस्थाओं की परेशानी को समझना नही चाहता अथवा उद्देश्यपूर्ण तरीके से नकारता जा रहा हैं । अशासकीय शिक्षण संस्थाएं वर्तमान समय में शिक्षा का प्रमुख आधार है एवं उनका ध्यान न रखा जाना ना सिर्फ भेदभाव पूर्ण है अपितू लाखों लोगों को रोजगार दे रही संस्थाओं के साथ अन्याय भी हैं।     

12 जुलाई को एक सांकेतिक कलम बंद, विद्यालय बंद प्रविधि द्वारा शासन की ओर अपनी निम्नानुसार मांगे प्रस्तुत कर रही है। कोरोना की तीसरी लहर की संभावना में लिए गए स्कूल बंद रखने के निर्णय पर अभिलंब पुनर्विचार हो। अशासकीय विद्यालयों को आर्थिक पैकेज अथवा सहायता के रूप में लोन पर लग रहे ब्याज की प्रतिपूर्ति की जाए। बिजली का बिल उपयोग की गई बिजली के अनुसार लिए जाए। डायवर्सन टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स, रोड टैक्स एवं परमिट फीस 2020-21 एवं 21- 22 हेतु पूर्णत: शुन्य किया जाए आरटीई प्रवेशित बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति 2020-21 तक अविलंब की जाए। कोरोना गाइड लाइन के अनुसार एसओपी का पालन करते हुए नवी से बारहवीं तक के स्कूल प्रारंभ करने की अनुमति दी जाए । इसके उपरांत अन्य कक्षाओं को भी प्रारंभ करने की अनुमति दी जाए । माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2021-22 हेतु फीस में भी कटौती न किए जाने का निर्णय पारित किया गया था। अतः सत्र 2021-22 में समस्त शुल्क प्राप्त करने की अनुमति प्रदान की जाए। जिस प्रकार आरटीई के तहत स्कूल बच्चों को निर्बाध शिक्षा देने के लिए बाध्य है। उसी प्रकार पालकों द्वारा समय पर फीस जमा करने की बाध्यता का कानून अथवा आदेश पारित होना आवश्यक है। इसके अभाव में संस्थाओं एवं पालकों के मध्य विद्वेष बढ़ता जा रहा है। साथ ही इस आदेश में यह भी व्यवस्था होनी चाहिए कि नए सत्र प्रारंभ होने तक भी यदि पालक पूर्व सत्र की फीस जमा नहीं करता है तो उसका प्रवेश निरस्त होकर अशासकीय विद्यालय पढ़ने की पात्रता समाप्त हो जाए। बिना नोड्यूज स्कूलों को टीसी देने के लिए बाध्य नहीं किया जाए। अशासकीय स्कूलों को प्रभावित करने वाले निर्णयों में अशासकीय शिक्षण संस्थाओं से दावे/आपत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया होना आवश्यक है। क्योंकि इसके अभाव में स्थिति को समझे बिना निर्णय लिए जाते हैं जिससे अंतत: पालकों एवं बच्चों का हित प्रतिकूल रूप से प्रभावित होता है । अशासकीय शिक्षण संस्थान स्कूल संचालक संघ देवास द्वारा एक दिन का सांकेतिक बंद रखकर शासन प्रशासन से उपरोक्त मांगो के त्वरित निराकरण की मांग की ।

Post Author: Vijendra Upadhyay