हम सबका प्रत्येक कृत्य उत्कृष्ट होगा तो भारत श्रेष्ठ बनेगा: मनमोहन वैद्य
संघ के शताब्दी वर्ष पर प्रमुख जन गोष्ठीयों का आयोजन
देवास। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष होने पर देशभर में प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन हो रहा है। इसी क्रम में मातृशक्तियों एवं प्रमुख जनों हेतु 2 अलग-अलग गोष्ठियों का आयोजन देवास के सेंट्रल इंडिया एकेडमी विद्यालय के सभागार में सम्पन्न हुआ। इन गोष्ठियों में मुखवक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारणी सदस्य मनमोहन वैद्य के साथ देवास विभाग संघचालक अजय गुप्ता एवं देवास जिला संघचालक विमल अग्रवाल मंचासीन रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्पांजली अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन कर हुआ।
प्रमुख जन गोष्ठी के मुख्यवक्ता मनमोहन वैद्य ने सम्बोधित करते हुए कहा की, हमे पहचानना होगा की हम कौन है? हमें जानना होगा कि राष्ट्रनिर्माण में हमारे पुर्वजों ने कितना कष्ट सहा है? स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी लंबे समय तक हम पश्चिम के देशों का अनुसरण करते रहें, हमारा स्व हमने जाना नहीं। आपने कहा कि भारतीय संस्कृति 4 बिंदुओं पर आधारित है, पहला बिंदु एकम सत विप्रा बहुदा वदन्ति, दूसरा बिंदु अनेकता में एकता, तीसरा बिंदु सभी प्राणियों में ईश्वर है एवं चौथा बिंदु ईश्वत का प्रकट करते हुए कार्य करना है। आपने बताया की यह राष्ट्र एक उद्यान की तरह है और हम सभी इस उद्यान में पौधे के रूप में है। किसी भी परिस्थिति में पौधे उद्यान का साथ नहीं छोड़ेंगे। भारत ने किसी देश को लुटा नहीं, किसी को मतांतरित नहीं किया, किसी देश को गुलाम नहीं बनाया। भारतिय विश्व में जहां भी गए वहां के लोगों को उध्योग सिखाया, व्यापार सिखाया, तकनीक सिखाई। भारत सदैव उद्योग प्रधान देश रहा है, सन 1700 तक विश्व डी पी में भारत की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक रही। आपने कहा कि हमें भारत के अध्यात्म का प्रकटीकरण करना है और भारत का अध्यात्म त्याग, समाज हित एवं पर्यावरण हित है। हम सबका प्रत्येक कृत्य एवं कार्य उत्कृष्ट हो तो भारत श्रेष्ठ बनेगा।
मातृशक्तियों को सम्बोधित करते हुए वैध ने कहा कि पहले घर की महिलाओं को उद्योग चलाने, उत्पादन करने एवं हिसाब किताब रखने का बहुत अच्छा ज्ञान था। जब पुरूष वर्ग घर के बाहर सामान बेचने जाता था और कई महीनों तक घर के बाहर रहते थे, तब महिलाएं घर की अर्थव्यवस्था को सम्हालती थी, इसी लिए उन्हें ग्रहलक्ष्मी कहा जाता है।
जिज्ञासा-समाधान सत्र में प्रतिभागियों ने मनमोहन से संघ एवं समाज से सम्बंधित विभिन्न विषयों पर प्रश्न के रूप में जिज्ञासाएं प्रकट की जिसका समाधान एवं उत्तर मनमोहन ने दिया। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम गान के साथ हुआ।


