लॉक डाउन में लॉक हुआ मध्यमवर्गीय परिवार

प्रांजल लांबोरे, देवास
यह कहानी हमारे समाज में एक मध्यमवर्गीय परिवार कि है जो महामारी में सबसे ज्यादा पीड़ित है। अमीर वर्ग के लोगों को किसी की सहायता की जरूरत नहीं होती वही गरीब के लिए संस्था आगे आ जाती है या उनके लिये कुछ सरकारी योजनाएं आ जाती है।
आज मैं आपको एक मध्यम वर्गीय परिवार का दर्द बताने जा रही हूं। सरकार, राजनीतिक दलों किसी की भी सहानुभूति इनके साथ नहीं है। यह कहानी है राहुल की जिसकी तनख्वाह महज ₹12000 है। जिसमे उसे अपने घर के लोगो का पेट भी भरना पड़ता है, घर भी चलना पड़ता है, बच्चो के स्कूल की फीस भी देना पड़ती है, लोन की क़िस्त भी देना पड़ती है, अब ऐसे में वह अपने खर्चे में कुछ ही रकम बचा पाता है।
आज लॉक डाउन में जहां सभी कुछ बंद है, आम आदमी की आमदनी का जरिया भी नहीं है। प्राइवेट नौकरी के कारण उसे तनख्वाह भी नहीं मिल पा रही है ऐसे में वह बहुत ही मुश्किलों से अपना जीवन यापन कर रहा है, ना मुफ्त का राशन न हीं लोन की किस्त की माफी। किसी सरकार द्वारा कोई आर्थिक मदद भी नहीं आने वाली बिल व किस्तों का बोझ अपने सिर पर लिए घूम रहा है। आर्थिक संकट उसे घेरे हुए हैं। ऐसे में उसके घर में रखे पैसे भी समाप्त हो रहे हैं। वही जमा पूंजी भी खर्च करनी पड़ रही है। कई तरह की अन्य परेशानियों का सामना भी उसे करना पड़ रहा है।
ऐसे कितने ही परिवार हैं जो इन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं ऐसे में मध्यमवर्गीय परिवार किसे अपना दुख सुनाएं। केंद्र सरकार व राज्य सरकार से निवेदन है कि मध्यम परिवार को ध्यान में रखते हुए उनके लिए भी कुछ योजनाएं व फंड निर्धारित किए जाए। कई लाभकारी व कल्याणकारी योजनाएं लाएं जिससे राहुल जैसे कई लोग स्वयं को आर्थिक रूप से मजबूत पाएं और देश की प्रगति में हमेशा सहायक रहे।
जय हिंद, जय भारत…

Post Author: Vijendra Upadhyay

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