शहरवासियों ने दिया साथ तो देवास को बनेगा विदेशी प्रोडक्ट मुक्त शहर

– मॉडल के रूप में तैयार हो सकता है देवास, मार्केट में दिखेगा सिर्फ स्वदेशी

देवास। देवास को अब विदेशी प्रोडक्ट मुक्त शहर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। एक-एक कर शहर के युवा और समाजसेवियों ने इसका बीड़ा उठाना शुरू कर दिया है, ताकि शहरवासी सिर्फ और सिर्फ स्वदेशी प्रोडक्ट ही अपनाए। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा, जिसमें सबसे पहले व्यापारियों को जागरूक किया जाएगा। व्यापारियों से अपील की जाएगी कि वे अपनी दुकानों में सिर्फ स्वदेशी प्रोडक्ट ही रखें, ताकि आमजन विदेशी प्रोडक्ट खरीदने से बच सके। खास बात यह है कि व्यापारी खुद तैयार है कि वे ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी माल का ही प्रचार करेंगे और बेचेंगे। समाजसेवियों द्वारा घर-घर जाकर आमजन को स्वदेशी प्रोडक्ट अपनाने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा। भाजपा नेता सुमेर दरबार और पार्षद रूपेश वर्मा ने तो इससे जुड़े पम्पलेट भी छपवा लिए है, ताकि शहर के छोटे-बड़े सभी व्यापारियों और आमजन को जागरूक किया जा सके। दोनों राजनैतिक पार्टी से जुड़े हैं, लेकिन इसका उल्लेख उन्होंने पम्पलेट पर नहीं किया है। समाजसेवी दरबार और वर्मा का कहना है कि यह अभियान राष्ट्रहित में है। पार्टी का नाम सामने आने से यह राजनैतिक रूप ले सकता है और अभियान को अंजाम तक पहुंचाने में परेशानी आ सकती है। यहीं कारण है कि हम इस अभियान को आम नागरिक के रूप में शुरू करेंगे, ताकि आमजन जुड़े और वे स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित हो सके।

स्वदेशी अपनाने से आर्थिक तंगाई से मिलेगी मुक्ति

समाजसेवी दरबार और वर्मा का कहना है कि कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण के चलते लॉकडाउन की स्थिति बनी और इसका असर यह है कि अब लोगों को लंबे समय तक आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। अब हमें लॉकडाउन या बंद जैसी स्थिति के लिए तैयार होने की जरूरत है ताकि विकट परिस्थियों में भी आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वदेशी अपनाने की बात कही है, जिसे आमजन गंभीरता से लेने लगे हैं। समाजसेवियों का कहना है कि अगर हम स्वदेशी अपनाते हैं तो इससे देशवासियों को आर्थिक समस्या नहीं होगी। देश का पैसा देश में रहेगा। बेरोजगारों को भी रोजगार मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

सूची जारी करने में लगेगा समय

बताया जा रहा है कि इस अभियान को लेकर कुछ संस्थाएं स्वदेशी और विदेशी प्रोडक्ट की सूची भी तैयार कर रही है, ताकि उसे जन-जन तक पहुंचाया जा सके। आमजन को स्वदेशी और विदेश प्रोडक्ट की जानकारी देना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कई विदेशी कंपनियां भारत में अपना प्रोडक्ट बेचने के भारतीय शब्दों का इस्तेमाल करती है, ताकि भारतवासियों को लगे कि वह स्वदेशी प्रोडक्ट है और लोग खरीद ले। वहीं भारत की कई कंपनियां ऐसी है जो अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि वह विदेशी लगे। इसका मुख्य कारण यह बताया गया है कि भारतीयों की सोच बन चुकी है कि लोग विदेशी प्रोडक्ट की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं इसलिए वे अपने देश के बजाय विदेशी नामों पर प्रोडक्ट का नाम रखते हैं।

किसी को नहीं होने देंगे नुकसान

समाजसेवी सुमेरसिंह दरबार का कहना है कि कई थोक व खेरची व्यापारियों के पास विदेशी प्रोडक्ट का स्टॉक है। लॉकडाउन के चलते वे बेच भी नहीं पाए है, लेकिन उनका पैसा अटका पड़ा हुआ है। ऐसे में उनका नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उनसे अाग्रह किया जाएगा कि विदेशी प्रोडक्ट खत्म होने के बाद वे विदेशी माल लेना बंद कर दें, क्योंकि मार्केट में जब विदेशी माल उपलब्ध ही नहीं होगा तो लोग खरीदना भी बंद कर देंगे। हालांकि कई तरह की परेशानियां भी आएगी, लेकिन स्वदेशी के प्रति अब भी नहीं जागे तो इसका खामियाजा आने वाली पीड़ी को भुगतना पड़ेगा।

एक-दूसरे का सहयोग जरूरी

समाजसेवी रूपेश वर्मा का कहना है कि भारत के हित में पूर्ण रूप से स्वदेशी माल को अपनाना पड़ेगा। अगर अब भी हम नहीं जागे तो आने वाले सालों में बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। हमारी कोशिश है कि दो माह में इस अभियान को एक-एक व्यक्ति के पास पहुंचा दिया जाए, ताकि अन्य शहरों में भी आमजन जागरूक होने लगे और पूर्ण रूप से स्वदेशी अपनाने लगे। शहरवासियों से भी लगातार अपील करेंगे कि वे शहर को विदेशी प्रोडक्ट से मुक्त करने में एक-दूसरे का सहयोग करें। हमारी मंशा है कि स्वदेशी अपनाने के मामले में शहर को देशभर में एक मॉडल के रूप में तैयार कर सके।

Post Author: Vijendra Upadhyay

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