जिले में 3395 घरों में एक साथ गृह गृह गायत्री यज्ञ

-कोरोना से मुक्ति एवं विश्व कल्याण की भावना से हुए घर घर यज्ञ
-देवास के इतिहास में अब तक सबसे बड़ा रिकॉर्ड दर्ज हुआ गृह गृह गायत्री यज्ञ का
देवास । इस समय वायु संक्रमण के कारण कोरोना महामारी पूरे विश्व में फैल रही हैं। इसकी रोकथाम के लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। इसी के तहत अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में इस महामारी से छुटकारा पाने, पर्यावरण संरक्षण एवं विश्व कल्याण के लिए गृहे गृहे गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत देवास जिले में 3395 घरों में पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ गृह गृह गायत्री यज्ञ हुए। वायु मण्डल को प्रदुषण मुक्त (सैनिटाइज) करने में गायत्री महायज्ञ सहायक होगा वहीं इस यज्ञ में प्रदान की गई औषधीय आहुतियां से प्रतिरोधक क्षमता ( इम्युनिटी पॉवर ) बढ़ाने में भी श्रद्धालुओं को मदद मिलेगी। गायत्री शक्तिपीठ के मीडिया प्रभारी विक्रमसिंह चौधरी ने बताया कि देवास में गृह गृह गायत्री महायज्ञ अभियान की तैयारियां जोर शोर से पिछले एक माह से चल रही थी जिसमें आम जन को हवन की संक्षिप्त विधि, मोबाइल पर लिंक द्वारा मार्गदर्शन दिया जा रहा था और कही कही तो प्रशिक्षण की व्यवस्था भी बनाई गई थी जिसमें श्रद्धालुओं ने नेट द्वारा भी मोबाइल पंडित का उपयोग किया और यज्ञ विधा से जुड़कर यज्ञ किया।
युवा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक प्रमोद निहाले ने जानकारी देते हुए कहा कि पूरे जिले की 07 तहसीलों में पूरे उत्साह से 3395 घरों में गायत्री यज्ञ हुए जिसमें खातेगांव – 625, कन्नौद – 200, बागली – 545 , सोनकच्छ – 250, सतवास 45 , उदयनगर – 26 हाटपिपल्या – 500 देवास शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र को मिलाकर 1204 घरों में गायत्री महायज्ञ हुए। गायत्री महायज्ञ में कई घरों में व्यसन मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाने का संकल्प भी लिया गया। जिला समन्वयक रमेशचन्द्र मोदी ने जानकारी में कहा कि गृह गृह गायत्री महायज्ञ पर्यावरण शुद्धि, घर को संक्रमण मुक्त बनाने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया गया हैं। प्रज्ञापीठ संरक्षिका दुर्गा दीदी ने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार औषधीय सामग्रियों की आहुतियां से संक्रमण दूर होता है श्रद्धालुओं ने इसी भावना से अपनी अपनी आहुतियां यज्ञ देवता को समर्पित की। इस यज्ञ का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण, वातावरण परिशोधन एवं कोरोना महामारी से मुक्ति हैं। जिले की तहसील प्रभारी महेश आचार्य, डॉ. राजेंद्र व्यास, गिरीश गुरु, पुरुषोतम परमार, रमेशचन्द्र मेहता, पुष्करलाल गुप्ता, हरिप्रसाद पांडे, राजेंद्र शर्मा, सुरेश भारद्वाज, देवीशंकर तिवारी सहित देवास एवं ग्रामीण क्षेत्रों की बहनों का विशेष योगदान रहा।

Post Author: Vijendra Upadhyay

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