पूछता है देवास – “किल कोरोना अभियान” क्या सिर्फ आकड़ो की कलाबाजी है?

देवास टाइम्स। देवास प्रशासन द्वारा 1 जुलाई से 15 जुलाई के बीच “किल कोरोना अभियान” चलाया गया था। जो कि राज्य शासन के निर्देश पर एवं कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला के मार्गदर्शन में हुआ। अभियान के अंतर्गत देवास जिले में एक जुलाई से शुरू किये गये “किल-कोरोना अभियान” के तहत दल द्वारा घर-घर सर्वे जांच व उपचार किया गया।
जिसमे देवास प्रशासन द्वारा दावा किया गया है कि सर्वे दल जिले के 3 लाख 21 हजार 999 घरों का सर्वे कर 17 लाख 66 हजार 471 लोगों से संपर्क किया गया। सर्वे दलों द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निरन्तर घर-घर जाकर सर्वे किया गया और सर्दी, खांसी, बुखार, मलेरिया, डेंगू व अन्य बीमारियों के लोगों को चिंहित किया गया। साथ ही सर्वे के दौरान 6122 व्यक्तियों के कोरोना जॉच हेतु सैम्पल लिये गए।


स्वास्थ्य कार्यकर्ता और एमएमयू टीम द्वारा जाँच व उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिले में कुल 1657 सर्वे दलों ने घर-घर सर्वे किया। जिनमें जिले कि आशा, एएनएम, आंगनवाडी और स्वास्थ्य कार्यकर्ता, सम्मिलित थी। सर्वे के दौरान 8318 गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच भी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर कि गई।
लेकिन यह दावा असफल तब लग रहा है, जब कितने ही लोगो ने यह शिकायत की है कि हमारे वार्ड में सर्वे टीम तो आई ही नही। देवास में ऐसे कितने ही वार्ड है जहां लोगो द्वारा यह भी शिकायत है कि अप्रैल माह से ही कभी भी हमारे यहां कोई टीम सर्वे के लिये आई ही नही हैं। आपको बता दे पूर्व कलेक्टर श्रीकांत पांडेय के समय भी सर्वे हुआ था। लेकिन वह भी कागजो तक ही सीमित हो गया था।
अब “किल कोरोना अभियान में” प्रशासन का दावा है कि
दिनांक 01 जुलाई से 15 जुलाई तक 97.76 प्रतिशत सर्वे पूर्ण हो चुका है। बाकी बचे 2.24 प्रतिशत में कितने वार्ड छूट गए है वह देवास प्रशासन ही बता पायेगा।
इन्ही बातों से यह सवाल उठता है कि “किल कोरोना अभियान” क्या सिर्फ आकड़ो की कलाबाजी है?

Post Author: Vijendra Upadhyay