शिव कथा जीवन को स्वच्छ बनाने की प्रेरणा देती है- पं. पाठक

नव दिवसीय शिव महापुराण कथा महोत्सव का समापन

देवास। श्री राधा महिला मण्डल एवं भक्तजनों के सहयोग से  नव दिवसीय शिव महापुराण कथा महोत्सव का आयोजन 1 अगस्त से नयापुरा स्थित श्रीराम मंदिर में चल रहा था। मण्डल की कला अग्रवाल ने बताया कि महोत्सव की पूर्णाहुति 9 अगस्त को हुई। पुराण वक्ता पं. राजेन्द्र प्रसाद पाठक ने अपने मुखारविंद से कहा कि शिव तपस्या, त्याग, संयम एवं करुणा की मूर्ति हैं। शिव पूजन से प्राणी में उपरोक्त गुण पैदा होते हैं। शिव की उपासना करने वाले में अगर त्याग, दया व संयम नहीं है तो विचार कर लेना चाहिए कि साधना में त्रुटि अवश्य रह गई है। शिव कथा जीवन को स्वच्छ बनाने की प्रेरणा देती है। शिव उपासक बड़े से बड़ा त्याग भी कर सकते हैं। मर्यादा को तोड़ने वाले जीव को शिव स्वीकार नहीं करते। पंडित जी ने कहा जब माता सती शिव के वचनों पर विश्वास न करते हुए श्री राम की परीक्षा लेने के लिए सीता का रूप बनाकर गई तो राम जी ने सीता रूप में आई हुई माता सती की चरण वंदना की एवं भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। भगवान शिव को जब सारी घटना का पता चला कि माता सती ने मर्यादा की पालना नहीं किया है। तभी शिव ने अपनी अर्धांगिनी सती का मन से परित्याग कर दिया। अगले जन्म में सती ने पार्वती का अवतार लेकर भगवान शिव को प्राप्त किया। व्यासपीठ की आरती मण्डल मधु तिवारी, मंजू बैस, कला तंवर, हेमा वर्मा, मनोरमा पुजारी, मीणा श्रीवास्तव, सुगना सहित अन्य महिलाओं ने की। अंत में प्रसादी का वितरण किया गया। 

Post Author: Vijendra Upadhyay