राज्य सरकार के खिलाफ न्यायालय जाएगा भाजपा पार्षद दल

संविधान में उल्लेखित धाराओं का हवाला देकर चुनाव आयुक्त व प्रमुख सचिव को लिखा पत्र
देवास। प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की देरी को लेकर अब धीरे-धीरे सवाल उठने लगे है। इसी बीच देवास के भाजपा पार्षद दल ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ न्यायालय जाने का मन बना लिया है। जिसके पहले चरण में प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं मुख्य चुनाव आयुक्त मप्र को नगरीय निकाय एक्ट 1956 एवं 1961 और भारतीय संविधान की धारा 243 (प) का हवाला देते हुए एक पत्र लिखा है।
देवास भाजपा दल के मनीष सेन, राजेश यादव एवं विनय सांगते ने इस संबंध में बताया कि नगरीय निकाय एक्ट एवं भारतीय संविधान में उल्लेखित है कि किसी भी नगरीय निकाय का कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व ही आगामी चुनाव कराने की तैयारी, परिसीमन, आरक्षण व चुनाव संपन्न कराना आवश्यक है, किंतु मप्र सरकार द्वारा 45 दिन पूर्ण होने के बाद भी नगरीय निकाय चुनाव कराने संबंधी कोई भी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है।

भाजपा पार्षद दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि मप्र सरकार जिस तरह से नगरीय निकाय चुनाव कराने से डर रही है, उससे साफ प्रतीत होता है कि मप्र में कांग्रेस की हालत दयनीय है और वह इस समय चुनाव हारने के डर से इस चुनाव को टालना चाहती है। सरकार के इस निर्णय से जहां प्रदेश के नगरीय निकायों में निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे है। वहीं अधिकारी भी निरंकुश होकर कार्य कर रहे है। वहीं मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने से जनता भी परेशान है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार ने विधानसभा चुनाव के समय जो वादे किए थे, वह भी धरातल पर आज तक नहीं उतरे है, शायद इसी के डर से मप्र सरकार द्वारा खुलेआम संविधान की धज्जियां उड़ाकर चुनाव टालने के प्रयास किए जा रहे है। भाजपा नेताओं ने बताया कि कांग्रेस सरकार जहां केंद्र की मोदी सरकार पर सर्वानुमति से पारित कानूनों को संविधान विरोधी बताकर आंदोलन कर रही है। वहीं दूसरी ओर मप्र की कांग्रेस सरकार संविधान को धता बताकर मनमानी कर रहे है, जिसकी भाजपा पार्षद दल निंदा करता है। भाजपा नेताओं ने मांग की है कि मप्र सरकार 5 दिवस के अंदर नगरीय निकाय चुनाव संबंधी घोषणा करें, अन्यथा जनहित में माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली जाएगी।

Post Author: Vijendra Upadhyay

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