दो शिक्षकों की मेहनत से अब बच्चे कर रहे हैं अच्छी पढ़ाई

शिक्षकों के उल्लेखनीय कार्य की हो रही है प्रदेश स्तर पर प्रशंसा
देवास, 01 मई 2020/ यह कहानी है देवास जिले के बागली ब्लॉक के अंतिम छोर पर स्थित शा.मा.वि. झिकड़ाखेड़ा (डाइस-23230409403) की जो कि बागली से लगभग 28 किलोमीटर दूर करनावद संकुल में जंगल के पास स्थित है। विद्यालय सन-2006 में उन्नत हुआ। इससे पहले प्राथमिक विद्यालय ही था। स्वयं का भवन नहीं होने से दोनों विद्यालय उसी में संचालित होते थे। सितम्बर 2007 में पहले शिक्षक विष्णु जादव आए उन्होंने प्रभार सम्भाला व फरवरी 2008 में दूसरे शिक्षक सुनील पाटीदार नियुक्त हुए। दोनों शिक्षकों ने बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया तथा बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि बढ़ने लगी।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शिक्षक विष्णु जादव तथा सुनील पाटीदार ने बच्चों के पढ़ाई के स्तर को ऊंचे लेवल पर लाने की बीड़ा उठाया और इसमें सफल भी हुए। उन्होंने बताया कि इनके अथक प्रयासों से बच्चों के सुंदर लेखन हेतु विशेष प्रयास किए परिणामस्वरूप बच्चों की हिंदी व अंग्रेजी के लेखन में गुणोत्तर सुधार हुआ। बच्चों की पढ़ाई संबंधी कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर भेजे तथा विद्यालयीन गतिविधियों का पहला वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। इसे भोपाल तक प्रोत्साहन मिला।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शिक्षकों की मेहनत के कारण विद्यालय में गणमान्य नागरिक तथा पत्रकार लोग भी आने लगे। मीडिया के माध्यम से स्कूल की गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित भी किया गया। लगभग 10 प्रादेशिक व राष्ट्रीय चैनलों पर गतिविधियों को दिखाया जा चुका है। सबसे सार्थक बदलाव की कहानी में जिले के चयनित स्कूलों का प्रदर्शन डाइट में हुआ था जिसमें विद्यालय प्रथम स्थान पर रहा था और प्रदेश स्तर पर भोपाल में विद्यालय का प्रदर्शन हुआ।
सत्र-2018-19 में विद्यालय को वॉल ऑफ फेम् (स्वर्ण शाला) सम्मान भी प्राप्त हो चुका है
सत्र-2018-19 में विद्यालय को वॉल ऑफ फेम (स्वर्ण शाला) सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। अगले सत्र में विद्यालय में स्मार्ट क्लास बनाने की भी योजना है। अभी वर्तमान में लोकडाउन में विद्यालय बन्द है और बहुत कम पालकों के पास ही एंड्रॉयड मोबाइल है। प्रधानाध्यापक विद्यालय के निकट गाँव में ही निवास करते हैं। अतः उन्होंने प्रा.वि. के शिक्षकों के साथ मिलकर खाद्यान्न वितरण के दौरान सभी बच्चों और पालकों से सम्पर्क किया। जिन पालकों के पास एंड्रॉयड मोबाइल था उन्हें डिजिलेप ग्रुप में जोड़ा गया और अन्य बच्चों को उन बच्चों के साथ 2-2, 4-4 के समूह में (सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए) व पालकों को विभिन्न चेनलों व रेडियो के माध्यम से 11 से 12 बजे के बीच बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया गया। लॉकडाउन में भी प्रतिदिन रेंडमली कुछ पालकों व बच्चों से मिलकर उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही बीमारी से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना और मास्क पहनने व बाहर नहीं निकलने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

Post Author: Vijendra Upadhyay

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