– प्रथम दिन नगर में निकली भव्य कलश यात्रा, जगह-जगह स्वागत
देवास। मोह से मोक्ष प्रदान करने और 84 लाख योनियों में भटकते अपने जीव को मोक्ष का प्रदान करने का सबसे सुगम मार्ग हे अपनी व्यस्त जीवन शैली में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर वैदिक पद्धति से पूजन अर्चन कर उनका विसर्जन करना। इससे हमारे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, जिससे हमे उनका आशीर्वाद मिलता है और परिवार में खुशहाली आती हैं। उक्त उद्गार ब्रह्मलीन संत देवप्रभाकर शास्त्री (दद्दा जी) के ज्येष्ट पुत्र अनिल शास्त्री ने रविवार को शिप्रा में शुरू हुए तीन दिवसीय पार्थिव शिवलिंग आयोजन में व्यक्त किये। इसके पूर्व शिप्रा नदी तट से बैंड बाजे के साथ केसरिया वस्त्र में 1001 कन्याएं लेकर कलश यात्रा में शामिल हुई। यात्रा नगर में भ्रमण करती हुई आयोजन स्थल पर संपन्न हुई यात्रा का जगह जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।

आयोजक रघुवीर सिंह भदौरिया और विश्वास उपाध्याय ने बताया कि 27 मार्च से 1 अप्रैल तक चलने वाले इस पार्थिव शिवलिंग निर्माण के साथ महारुद्राभिषेक एवं महारुद्र यज्ञ का आयोजन भी किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए अभिषेक सामग्री निशुल्क प्रदान की जा रही है। शिवलिंग निर्माण प्रात 8 बजे से,रुद्राभिषेक दोपहर 12 बजे से, प्रसादी 1 बजे से वितरित की जा रही है। प्रथम दिन दर्जनों गांव के सैकड़ों महिला पुरुष इस आयोजन में शामिल हुए और करीब एक लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर अभिषेक के बाद शिप्रा नदी में विसर्जन किया गया।आयोजको ने अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील श्रद्धालुओं से की है।
