भगवान् शिव त्रिदेवों में से एक है जिन्हें मृत्यु का देवता भी कहा जाता है इसी कारण से इन्हें महाकाल के नाम से जाना जाता है इनकी भक्ति करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है व मोक्ष की प्राप्ति होती है. जिस प्रकार इनका पहनावा भस्म, सर्प आदि है उसी प्रकार इनका प्रसाद […]
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गायत्री शक्तिपीठ एवं गायत्री प्रज्ञापीठ पर महाशिवरात्रि पर हुए विभिन्न कार्यक्रम
देवास। गायत्री शक्तिपीठ साकेत नगर एवं गायत्री प्रज्ञापीठ विजय नगर पर महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा एवं उत्साह पूर्वक मनाया गया। गायत्री शक्तिपीठ जनसंचार विभाग के विक्रमसिंह चौधरी एवं विकास चौहान ने बताया कि 13 फरवरी को प्रात 7 बजे से भगवान प्रज्ञेश्वर महादेव का रूद्राभिषेक किया गया। प्रात 9.30 बजे से श्री वेदमाता गायत्री, परम […]
?रुद्राभिषेक से क्या क्या लाभ मिलता है ?
शिव पुराण के अनुसार किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है अर्थात आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे है उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल करना चाहिए का उल्लेख शिव पुराण में किया गया है उसका सविस्तार विवरण प्रस्तुत कर रहा हू और आप से अनुरोध है की आप […]
जानिए महा शिव रात्रि 14 फरवरी को मनाएंगे या 13 फरवरी
भगवान शिव की आराधना का यह विशेष पर्व माना जाता है। पौराणिक तथ्यानुसार आज ही के दिन भगवान शिव की लिंग रूप में उत्पत्ति हुई थी। प्रमाणान्तर से इसी दिन भगवान शिव का देवी पार्वती से विवाह हुआ है। अतः सनातन धर्मावलम्बियों द्वारा यह व्रत एवं उत्सव दोनों रूप में अति हर्षोल्लास के साथ मनाते […]
चिंता और चिता में बिंदी मात्र का अंतर है- पं. महेश भाई गुरूजी
देवास। चिंतन और चिंता का एक ही आशय होते हुए भी इनमे बहुत अंतर है। चिंतन का अर्थ होता है, विचार करना और चिंता का अर्थ होता है, विचारों में घुलना चिंतन में विचारों का प्रवाह होता है। जबकी चिंता में विचारों की उथल-पुथल मची रहती है। चिंतन में विचारों का भोझ नहीं होता, चिंता […]
ओ३म् की महिमा
गोपथ ब्राह्मण में ओंकार की महिमा:- गोपथ ब्राह्मण में ओ३म् की महिमा विषेश ध्यान देने योग्य है।यथा श्लोक (गो० 1/22) जिसके अर्थ इस प्रकार हैं, कि जो ब्रह्मोपासक इस अक्षर ‘ओ३म्’ की जिस किसी कामना पूर्ति की इच्छा से तीन रात्रि उपवास रखकर तेज-प्रधान पूर्व दिशा की ओर मुख करके, कुशासन पर बैठकर सहस्र बार […]
भगवान शिव से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
भगवान शिव से जुड़े कुछ रोचक तथ्य :- ~~~>>~~~>>∆
राष्ट्रीय क्रांति युवा रथ का भव्य स्वागत
देवास । अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुंज हरिद्वार द्वारा युवा जोड़ो अभियान के अन्तर्गत आगामी 25 से 28 जनवरी को नागपुर में राष्ट्रीय युवा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा इस हेतु पूरे भारत मे युवा क्रांति रथ भ्रमण पर है जिनका लक्ष्य है युवाओ का परिष्कार कर उनकी प्रतिभा को समाज के लिए समर्पित करना। गायत्री […]
अचानक जेसीबी धसी और जमीन से निकला ये ‘कीमती शिवलिंग’
संदीप हिंदुस्तानी, हरियाणा –——————– ??हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय?? अचानक जेसीबी धसी और जमीन से निकला ये ‘कीमती शिवलिंग’ कानपुर के कोयला घाट कैंट कानपुर में नमामि गंगे के अंतर्गत खुदाई करते समय शिवलिंग निकला । उत्तर प्रदेश के कानपुर में खुदाई के दौरान अचानक जेसीबी धसने लगी। खट खट की आवाज आई। खुदाई […]
दुश्मनो से केसे लड़ा जाये यह सिखाया था महान योद्धा तक्षक ने..
सन 711ई. की बात है। अरब के पहले मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद बिन कासिम के आतंकवादियों ने मुल्तान विजय के बाद एक विशेष सम्प्रदाय हिन्दू के ऊपर गांवो शहरों में भीषण रक्तपात मचाया था। हजारों स्त्रियों की छातियाँ नोच डाली गयीं, इस कारण अपनी लाज बचाने के लिए हजारों सनातनी किशोरियां अपनी शील की रक्षा के […]
गायत्री’ मंत्र का हर दिन जाप, दिलाता है आपको ये महालाभ
मंत्रों में “सर्वश्रेष्ठ” मंत्र है गायत्री मंत्र। मानवमात्र जाप करे ➖➖➖➖➖ हर प्रकार की समस्याओं को दूर करता है। सिर्फ सुनने से भी शरीर को लाभ पहुंचता है। सकारात्मकता और त्वचा में चमक आती है। *गायत्री मंत्र:- ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।* “इस मंत्र का जाप एक ऐसा उपाय […]
बातें बिल्व वृक्ष की ओर शिव की पूजा
बातें बिल्व वृक्ष की—- ⚡1. बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते । ⚡2. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है । ⚡3. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है । ⚡4. चार पांच छः या […]
निधिवन में हर रात श्रीकृष्ण यहां आते है
*?निधिवन में हर रात श्रीकृष्ण यहां आते है??* *देखने वाले की हो जाती हैं मौत या हो जाते हैं पागल।* *भारत में कई ऐसी जगह हैं, जो कई रहस्यमयी चमत्कारों से भरी हैं। ऐसी ही एक जगह है, वृंदावन का निधि वन। जिसके बारे में मान्यता है कि यहां आज भी हर रात श्रीकृष्ण गोपियों […]
जनेऊ क्या है और इसकी क्या महत्वता है?
*जनेऊ क्या है और इसकी क्या महत्वता है?* *भए कुमार जबहिं सब भ्राता। दीन्ह जनेऊ गुरु पितु माता॥ जनेऊ क्या है : आपने देखा होगा कि बहुत से लोग बाएं कांधे से दाएं बाजू की ओर एक कच्चा धागा लपेटे रहते हैं। इस धागे को जनेऊ कहते हैं। जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता […]
आरती फाल्गुन मेले से पहले चढायेगी 21 सौ निशान
श्याम दिवानी आरती चढाती है बाबा श्याम को रोजाना पैदल 21 निशान.. फाल्गुन मेले से पहले चढायेगी 21 सौ निशान यूं तो आपने बाबा श्याम के लाखों भक्तों देखे हैं जो निशान लेकर खाटू नगरी जाते हैं तथा बाबा के दर पर शीश झुकाते है, लेकिन बाबा की एक दिवानी भक्त ऐसी भी है जो […]
देवउठनी एकादशी का महत्व व पूजन विधि
पूरे साल 24 एकादशी होती है. हर महीने दो एकादशी पड़ती है, एक शुक्ल पक्ष में तो दूसरी कृष्ण पक्ष में. सभी एकादशी में कार्तिक शुक्ल एकादशी का विशेष महत्व होता है. इसे देवप्रबोधनी एकादशी या देव उठानी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस बार ये एकादशी 31 अक्टूबर, मंगलवार को पड़ […]
दीपावली पर करे ये उपाय ओर दरिद्रता को दूर करे
25 उपाय यहां दिए जा रहे हैं, इन्हें सभी राशियों के लोग कर सकते हैं। इनमें से कोई भी एक या अधिक उपाय करने से दरिद्रता दूर होकर सुख-सम्पत्ति का आगमन होता है। 1. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटी बजाना चाहिए। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा […]
धनतेरस को क्या नही खरीदे
धनतेरस 2017 :- यह पर्व प्रति वर्ष कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है । धनतेरस के दिन धन्वन्तरी देवता के साथ , माता लक्ष्मी गणेश इंद्र और धन के देवता कुबेर की विशेष पूजा का महत्व और विधान है इसलिए इस दिन भी दीपावली के भांति इन सब की पूजा […]
दशहरा अर्थात विजयादशमी संबंधित अध्यात्मशास्त्रीय जानकारी
अश्विन शुक्ल दशमी की तिथि पर दशहरा मनाते हैं । दशहरे के पूर्व के नौ दिनों तक अर्थात नवरात्रि काल में दसों दिशाएं देवी मां की शक्ति से संचारित होती हैं । दशमी की तिथि पर ये दिशाएं देवी मां के नियंत्रण में आ जाती हैं अर्थात दिशाओं पर विजय प्राप्त होती है । विजयादशमी […]
कुलदेवता और कुलदेवी की पूजा क्यों करनी चाहिये?
हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुलदेवता और कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है, प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज है जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है, बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म करने के लिए, जो बाद में उनकी विशिष्टता बन गया और जाति कहा […]

